आयुष मंत्रालय अगले हफ्ते करेगा दो दिवसीय कार्यक्रम, राष्ट्रीय आयुष मिशन को और मजबूत बनाने पर होगी चर्चा

नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। आयुष मंत्रालय अगले सप्ताह अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) में दो दिन का कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है। यह कार्यक्रम 3 और 4 सितंबर को होगा और इसका विषय है ‘राष्ट्रीय आयुष मिशन और राज्यों में क्षमता निर्माण’। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव करेंगे। रविवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी अपने अनुभव और सुझाव साझा करें। उनके सुझावों पर गहराई से चर्चा की जाएगी ताकि राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) को और मजबूत किया जा सके। यह मिशन देश में आयुर्वेद, योग-प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी जैसी पद्धतियों को बढ़ावा देने और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए बनाया गया है।
यह सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर आयोजित छह बड़े विषयों से जुड़े शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला का अंतिम कार्यक्रम है। इन सम्मेलनों का मकसद केंद्र और राज्य सरकारों को एक मंच पर लाना है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर मिलकर विचार किया जा सके और अधिकारी हर स्तर पर क्षमता निर्माण कर सकें।
इस बार का विषय ‘राष्ट्रीय आयुष मिशन और राज्यों में क्षमता निर्माण’ चुना गया है। इसके लिए नीति आयोग ने आयुष मंत्रालय को नोडल मंत्रालय बनाया है, और इसमें स्वास्थ्य मंत्रालय भी सहयोग कर रहा है।
बेहतर चर्चा के लिए छह उप-समूह बनाए गए हैं। हर समूह राष्ट्रीय आयुष मिशन के अलग-अलग पहलुओं पर काम करेगा। इनमें वित्तीय प्रबंधन, संगठनात्मक सुधार, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और आईटी-सक्षम सेवाएं जैसी बातें शामिल हैं। हर उप-विषय के लिए दो नोडल राज्यों को जिम्मेदारी दी गई है, ताकि चर्चा और परिणाम दोनों ही अधिक प्रभावी हों।
सरकार का मानना है कि आयुष प्रणालियां भारत की स्वास्थ्य सेवाओं का अभिन्न हिस्सा हैं। इस कार्यक्रम से यह संदेश दिया जाएगा कि आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की पहुंच और गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे।
यह दो दिवसीय शिखर सम्मेलन राष्ट्रीय आयुष मिशन की पूरी क्षमता को सामने लाने और राज्यों के स्तर पर संस्थागत क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
–आईएएनएस
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