सोमनाथ मंदिर का इतिहास केवल विनाश की कथा नहीं, बल्कि विजय और संकल्प की अमर गाथा है : चिदानंद सरस्वती


ऋषिकेश, 5 जनवरी (आईएएनएस)। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने सोमनाथ मंदिर के विध्‍वंस के एक हजार साल पूरे होने को लेकर गहन और भावनात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्‍होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास केवल विनाश की कथा नहीं, बल्कि विजय, संकल्प और गौरव की अमर गाथा है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है और यह शाश्वत शंखनाद तथा सत्य सनातन का घोष है।

उन्होंने कहा क‍ि इतिहास साक्षी है कि सोमनाथ को बार-बार तोड़ा गया, लूटा गया और अपवित्र किया गया, लेकिन हर बार भारत की चेतना और अधिक मजबूती के साथ उठ खड़ी हुई। पत्थर टूटे, शिखर गिरे, लेकिन आस्था और संकल्प कभी नहीं टूटा।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि इतिहास में कई आक्रांता आए, जिनमें अहंकार, गर्जना और विनाश का उन्माद था। उन्होंने यह घोषणा की कि वे सब कुछ मिटा देंगे, लेकिन अंततः मिटने वाले वही स्वयं बने। न जाने कितने गजनवी आए और चले गए, उनके साम्राज्य ढह गए, ऐश्वर्य मिट्टी में मिल गया, लेकिन उसी धरती पर सोमनाथ आज भी पूरे तेज, शांति और अटल संकल्प के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ आज भी यह उद्घोष कर रहा है कि ‘सत्यमेव जयते’, क्योंकि सत्य की ही विजय होती है और सत्य पर आधारित शक्ति को कोई नष्ट नहीं कर सकता। समय ने बड़े-बड़ों को बदला है, लेकिन सत्य की चट्टान के सामने हर बाधा को हटना पड़ा है।

उन्होंने 1026 से 2026 तक के एक हजार वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कालखंड भारत की अटूट आस्था, धैर्य और पुनरुत्थान का प्रतीक है। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने महारानी अहिल्याबाई होलकर द्वारा किए गए पुनरुद्धार, भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल के अटल संकल्प और वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ के गौरव के पुनः वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित होने को भारत की विजय गाथा बताया।

इसी क्रम में मथुरा के वृंदावन में संतों ने सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले की स्मृति में रुद्राभिषेक किया। संतों ने कहा कि महमूद गजनवी का उद्देश्य केवल सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त करना नहीं था, बल्कि पूरे देश से सनातन परंपरा को समाप्त करना था। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने पर संत समाज ने इसे स्मरण का विषय बताया। संतों ने कहा कि वर्ष 1026 में अफगानिस्तान के गजनी से आए महमूद गजनवी ने मंदिर पर बड़ा हमला कर उसे ध्वस्त किया था, लेकिन बार-बार हुए आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ आज भी अडिग खड़ा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिखे गए लेख का उल्लेख करते हुए संतों ने कहा कि सोमनाथ भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की जीवंत गाथा है, जिसने हर चुनौती के सामने देश की आत्मा को जीवित रखा।

धर्म रक्षा मंच के संत सौरभ गौड़ ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि एक हजार वर्ष पूर्व महमूद गजनवी भारत आया और उसने सोमनाथ मंदिर को लूटने के साथ-साथ सनातन को नष्ट करने की योजना बनाई थी। उसने मंदिर को नुकसान पहुंचाया, लेकिन सनातन और भोलेनाथ की शक्ति के कारण आज भी सोमनाथ का अस्तित्व कायम है, यह सनातन धर्म के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रीराम मंदिर का भव्य और दिव्य निर्माण हुआ, उसी प्रकार उस समय के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का अद्भुत कार्य कराया।

वहीं, आचार्य बद्रीश ने कहा कि भारतवर्ष की मूल धारणा ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ रही है, लेकिन आक्रांताओं ने भारत आकर हिंसा और विनाश फैलाया। इसके बावजूद भारत अपनी परंपरा और संस्कृति पर अडिग रहा। उन्होंने कहा कि आज देश धन्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम-लक्ष्मण की तरह धर्म की रक्षा कर रहे हैं और यह समय आनंद और गौरव का है।

धर्मगुरु मोहिनी बिहारी शरण ने कहा कि महमूद गजनवी ने भारत की अखंडता और संप्रभुता को नष्ट करने का प्रयास किया था, लेकिन वह अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की परंपरा, सभ्यता और संस्कृति का प्रतीक है, जो आज भी देश की आत्मा और सनातन चेतना का सशक्त स्वर बनकर खड़ा है।

–आईएएनएस

एएसएच/जीकेटी


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