सरकार को वक्फ और ट्रस्ट का फर्क नहीं मालूम : कपिल सिब्बल

नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। वक्फ संशोधन बिल गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया, जिस पर विभिन्न दलों के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इस बिल पर कई सवाल उठाए। सिब्बल ने इस बिल के उद्देश्य और इसके प्रभाव पर गंभीर सवाल उठाए तो वहीं, सिंघवी ने इसे असंवैधानिक करार दिया।
कपिल सिब्बल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि सरकार को वक्फ और ट्रस्ट के बीच अंतर समझने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिमी देशों में लोग अपनी संपत्ति को ट्रस्ट के तहत दान कर देते हैं, जिससे वह संपत्ति चैरिटी के लिए इस्तेमाल होती है और उसे बेचा भी जा सकता है। लेकिन वक्फ में ऐसा नहीं है। जब कोई अपनी संपत्ति वक्फ करता है, तो वह भगवान को समर्पित कर दी जाती है और उसे बेचना या बदलना संभव नहीं होता। वक्फ एक स्थायी चीज होती है, जिसे किसी भी प्रकार से बदला या बेचा नहीं जा सकता।
सिब्बल ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह मुसलमानों को गलत दिशा में ले जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कह रही है कि विपक्ष मुसलमानों को गुमराह कर रहा है, लेकिन क्या गुमराह किया जा रहा है? यह बताइए, मुसलमानों को किस तरह से फायदा पहुंचा रहे हैं? अगर सरकार ‘वन नेशन, वन लॉ’ की बात करती है, तो यह कानून केवल मुसलमानों पर क्यों लागू किया जा रहा है? अन्य संस्थाओं पर क्यों नहीं?
राज्यसभा सांसद ने कहा कि कई सरकारी जमीनें हैं, जिन पर लोगों ने कब्जा कर रखा है, लेकिन सरकार उन पर कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने उदाहरण के तौर पर कहा, “अगर कल को यह कहा जाए कि चार सौ साल पुरानी जामा मस्जिद अब वक्फ नहीं है, तो क्या होगा?” उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर किसी की अपनी संपत्ति है, तो उसे अपनी मर्जी से इस्तेमाल करने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए।
राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने भी इस बिल पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बिल संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन करता है, क्योंकि इससे धार्मिक समुदायों को अपने संस्थानों के संचालन में स्वायत्तता की स्वतंत्रता कम कर दी गई है। सिंघवी ने आरोप लगाया कि सरकार ने अब सरकारी नियंत्रण तंत्र को बढ़ा दिया है, जिससे धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस बिल को जिद में पारित कर देती है, तो यह न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है और अदालत इसे असंवैधानिक करार दे सकती है।
–आईएएनएस
पीएसके/एकेजे