मौजूदा वक्फ कानून कमजोर नहीं, सरकार खुद फैला रही भ्रम : रहमान खान (आईएएनएस साक्षात्कार)

बेंगलुरु, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर जारी आरोप-प्रत्यारोपों के बीच बुधवार को कांग्रेस नेता और यूपीए सरकार में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रहे के. रहमान खान ने कहा कि मौजूदा वक्फ कानून काफी मजबूत है और सरकार खुद ही यह भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है कि इस कानून में खामियां हैं। उन्होंने इस विधेयक को लोकतांत्रिक फैसला नहीं, ‘बहुसंख्यकवादी लोकतंत्र’ का फैसला बताया।
रहमान खान ने समाचार एजेंसी आईएएनएस के साथ एक विशेष साक्षात्कार में बदलते समय के साथ कानून में बदलाव का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, वक्फ संपत्ति की प्रकृति कभी नहीं बदली जा सकती।
उन्होंने सैयद अली और अन्य बनाम आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कुछ टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने कहा है कि एक बार जब कोई संपत्ति वक्फ कर दी जाती है, तो वह अल्लाह की संपत्ति बन जाती है। उसे किसी और के नाम पर हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा संविधान का अनुच्छेद 25 हर धर्म के लोगों को अपनी धार्मिक संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार देता है। यदि मौजूदा संशोधन को सरकार को लागू करना है, तो संविधान में भी बदलाव करने होंगे क्योंकि सरकार वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम लोगों को भी जगह देना चाहती है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी संवैधानिक तरीके से इस मामले में पूरी लड़ाई लड़ेगी और अदालत तक जाएगी।
कांग्रेस नेता ने सरकार पर भ्रम फैलाने और लोगों को उकसाने के आरोप लगाते हुए कहा, “जो विधेयक लाया गया है और जिस तरह से लोगों को गुमराह किया जा रहा है – यह पूरी तरह से गलत कहानी है। यह बदला लेने वाला कानून है। मैं इसे बदला लेने वाला इसलिए कह रहा हूं क्योंकि भाजपा ने पहले संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की विभिन्न समितियों में इन बदलावों का 100 प्रतिशत समर्थन किया था। अब उन्होंने इसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया है, गलत तरीके से पेश किया है और लोगों को पूरी तरह से गलत तथ्य दिए हैं। वे लोगों में डर पैदा कर रहे हैं, यह संकेत दे रहे हैं कि उनकी जमीन छीन ली जाएगी। यह सब दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सब एक झूठी कहानी है।”
पुराने कानून के कमजोर होने की बात को खारिज करते हुए के. रहमान खान ने कहा कि वक्फ बोर्ड ने दिल्ली की 400 से ज्यादा संपत्तियों पर दावा किया था जिनमें संसद भवन और दूसरी बड़ी-बड़ी इमारतें शामिल थीं। इसके बाद मामला 20 साल तक अदालत में चला। सचिवों की समिति भी बनाई गई। अंत में कुल 123 संपत्तियों की पहचान वक्फ संपत्ति के रूप में हुई जिनमें ज्यादातर मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान थे।
सरकार ने इन 123 संपत्तियों को वक्फ बोर्ड को 100 साल के पट्टे पर दे दिया। बाद में किसी ने मामला दायर किया और अदालत ने फैसला सुनाया कि अगर ये वक्फ संपत्तियां हैं, तो उन्हें वापस कर दिया जाना चाहिए और उन्हें डीनोटिफाई किया जाना चाहिए। यह उचित प्रक्रिया के बाद किया गया। यहां कोई ड्रामा नहीं है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मौजूदा कानून कोई “जंगल का कानून” नहीं है, जैसा कि दावा किया जा रहा है। मौजूदा कानून में यह तय करने के लिए न्यायाधिकरण अदालत है कि यह वक्फ संपत्ति है या नहीं। इसके अलावा, इस बारे में विवादों को हल करने के लिए एक न्यायाधिकरण है कि संपत्ति वक्फ है या नहीं। यह आयकर और राजस्व न्यायाधिकरण जैसे अन्य न्यायाधिकरणों के समान है। सरकार फिर से लोगों को गुमराह कर रही है।”
वहीं, प्रस्तावित संशोधन में डीएम को सारे अधिकार दिए गए हैं। उसके ऊपर निगरानी के लिए सचिव स्तर का अधिकारी होगा और अंतिम फैसले का अधिकार मंत्री को दिया गया है, यानी सारे अधिकार एक तरह से सरकार के पास होंगे।
प्रशासनिक खामियों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि हजारों संपत्तियों का सर्वेक्षण नहीं किया गया है। कानून में हर 10 साल में सर्वेक्षण अनिवार्य है। उन्होंने दावा किया कि वक्फ संपत्तियों का डाटा कंप्यूटरीकृत करने का काम यूपीए सरकार के समय शुरू किया गया था।
वक्फ की संपत्तियों के दुरुपयोग के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक मसला है और इसे विधेयक से जोड़ना गलत होगा। यूपीए की सरकार के समय किए गए संशोधन में ही यह प्रावधान किया गया था कि वक्फ की संपत्ति के दुरुपयोग पर तीन साल तक जेल की सजा हो सकती है।
कांग्रेस नेता ने मौजूदा विधेयक को “सरकार द्वारा दिनदहाड़े की गई लूट” करार देते हुए कहा, “लोकतंत्र में, हमें लोकतांत्रिक तरीके से लड़ना चाहिए। हमें अपनी न्यायपालिका और लोगों पर भरोसा है।
–आईएएनएस
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