मनरेगा की बहाली की मांग को लेकर तेलंगाना कांग्रेस का 45 दिन का राज्यव्यापी आंदोलन


हैदराबाद, 8 जनवरी (आईएएनएस)। तेलंगाना की सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की बहाली की मांग को लेकर राज्यभर में 45 दिनों तक आंदोलन चलाने का फैसला किया है।

गुरुवार को पार्टी मुख्यालय गांधी भवन में हुई तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में हाल ही में संसद द्वारा पारित विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम (वीबी जी राम जी) का विरोध करने का संकल्प लिया गया, जिसे मनरेगा के स्थान पर लाया गया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, एआईसीसी प्रभारी मीनाक्षी नटराजन और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में आंदोलन की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई।

कांग्रेस नेताओं ने वीबी जी राम जी को ग्रामीण गरीबों के लिए “मृत्युदंड” करार दिया और कहा कि आंदोलन के दौरान इस नए कानून के उन प्रावधानों को उजागर किया जाएगा, जो गरीबों और खेत मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं।

पार्टी 20 जनवरी से 30 जनवरी तक राज्य की 12,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाएं आयोजित करेगी। इन ग्राम सभाओं में मनरेगा की बहाली की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किए जाएंगे, जिन्हें राष्ट्रपति को भेजा जाएगा।

इसके अलावा, 3 फरवरी से सभी जिलों में जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। मुलुगु में एक विशाल जनसभा करने की भी योजना है, जिसमें कांग्रेस के शीर्ष नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी को आमंत्रित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार पर मनरेगा की जगह नया कानून लाने के लिए तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि देश की 140 करोड़ आबादी में से 80 प्रतिशत लोग कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई रोजगार गारंटी योजना के लाभार्थी थे। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने नीति बदलकर गरीबों को परेशान किया है।

रेवंत रेड्डी ने कहा कि मनरेगा ने गरीबों का आत्मसम्मान बढ़ाया और इस योजना के क्रियान्वयन का प्रमुख मंच तेलुगु राज्य रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार गारंटी योजना में बदलाव कुछ बड़े उद्योगपतियों को सस्ता श्रम उपलब्ध कराने के लिए किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य विधानसभा पहले ही मनरेगा में किए गए बदलावों के खिलाफ सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य के सांसदों को भी संसद के बजट सत्र के पहले दिन इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराना चाहिए।

–आईएएनएस

डीएससी


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