भारत में अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ का यूएस का कैलकुलेशन वास्तविकता से अधिक : बर्नस्टीन


नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। दिग्गज ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने कहा कि भारत में अमेरिकी वस्तुओं पर लगने वाले टैरिफ का यूएस का कैलकुलेशन अनुमान से अधिक है, क्योंकि इसमें देश में घरेलू स्तर पर लगने वाले टैक्स को भी शामिल कर लिया गया है।

बर्नस्टीन के विश्लेषण के मुताबिक है कि अमेरिका द्वारा भारत पर 26 प्रतिशत जवाबी टैरिफ लगाने के लिए उपयोग की गई टैरिफ दर ‘वास्तविकता से अधिक’ है।

ब्रोकरेज ने कहा कि “अमेरिकी कैलकुलेशन में घरेलू करों और मुद्रा में उतार-चढ़ाव जैसे गैर-टैरिफ उपाय शामिल हैं, जिससे अमेरिकी वस्तुओं पर भारत द्वारा लगाए गए टैरिफ कैलकुलेशन में अधिक हो जाता है।”

ब्रोकरेज ने कहा कि भारी टैरिफ से अमेरिका में महंगाई दर पर असर होगा, जिससे मांग में कमी आएगी और मंदी की संभावना बढ़ जाएगी।

हालांकि, बर्नस्टीन का मानना ​​है कि वर्तमान टैरिफ उपाय संभवतः वार्ता के लिए शुरुआती बिंदु हैं और इनमें से कई टैरिफ 2025 की दूसरी छमाही में समाप्त हो सकते हैं।

अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं के लिए निर्धारित 26 प्रतिशत टैरिफ अधिक है, लेकिन आईटी सेवाओं और फार्मास्यूटिकल्स जैसे देश के प्रमुख निर्यातों को इससे छूट दी गई है। यह दोनों सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहम हैं।

बर्नस्टीन का मानना है कि चीनी वस्तुओं पर अधिक टैरिफ होने से भारत को इसका फायदा मिल सकता है।

हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि 1 अप्रैल को राष्ट्रपति ट्रंप और कांग्रेस को सौंपी गई यूएसटीआर रिपोर्ट में कहा गया है कि “भारत द्वारा मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) पर लागू औसत टैरिफ दर 17 प्रतिशत है।”

रिपोर्ट में बताया गया कि भारत ने कई प्रकार की वस्तुओं पर उच्च टैरिफ लागू कर रखा है, जिनमें वनस्पति तेल, सेब, मक्का और मोटरसाइकिल पर 50 प्रतिशत, ऑटोमोबाइल और फूल पर 60 प्रतिशत और मादक पेय पर 150 प्रतिशत टैरिफ हैं।

रिपोर्ट में बजट 2025-26 में अमेरिकी वस्तुओं के लिए घोषित भारतीय टैरिफ में कटौती को शामिल नहीं किया गया है।

उदाहरण के लिए, बाइक पर शुल्क घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि बॉर्बन व्हिस्की पर शुल्क 150 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है।

–आईएएनएस

एबीएस/


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