एचआईवी से पीड़ित लोगों के लिए कम आंका गया है हृदय संबंधी जोखिम : अध्ययन


न्यूयॉर्क, 19 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी शोधकर्ताओं की एक टीम ने पाया है कि एचआईवी से पीड़ित लोगों के लिए, वर्तमान जोखिम मॉडल ने उच्च-आय वाले देशों में महिलाओं और अश्वेत पुरुषों में हृदय संबंधी घटनाओं को कम आंका है।

लैंसेट एचआईवी जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, हृदय रोग (कार्डियोवस्कुलर डिजीज) वैश्विक स्तर पर बीमारी और मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है। यह समस्या एचआईवी से पीड़ित लोगों के लिए और भी गंभीर है।

पहले के शोधों में यह सवाल उठाया गया था कि क्या सामान्य तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले जोखिम अनुमान मॉडल एचआईवी संक्रमित लोगों के लिए सही काम करते हैं। खासकर, कम और मध्यम आय वाले देशों में एचआईवी से पीड़ित लोगों पर इन मॉडलों का प्रभाव पूरी तरह समझा नहीं गया है।

मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल और अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने इस बात का अध्ययन किया कि मौजूदा एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवस्कुलर डिजीज (एएससीवीडी) जोखिम अनुमान मॉडल एचआईवी संक्रमित लोगों में हृदय संबंधी समस्याओं की भविष्यवाणी कितनी सही कर पाते हैं।

इस अध्ययन में आरईपीआरआईईवीई (रेंडमाइज्ड ट्रायल टू प्रिवेंट वैस्कुलर इवेंट्स इन एचआईवी) डेटा का उपयोग किया गया, जिसमें कम, मध्यम और उच्च आय वाले देशों के एचआईवी संक्रमित लोगों की जानकारी शामिल थी।

शोधकर्ताओं ने पाया कि उच्च-आय वाले देशों में महिलाओं और अश्वेत पुरुषों के लिए इन मॉडलों ने हृदय संबंधी जोखिम को कम आंका, जबकि कम और मध्यम आय वाले देशों के एचआईवी संक्रमित लोगों के लिए इन जोखिमों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया।

नेशनल हार्ट, लंग और ब्लड इंस्टीट्यूट (एनएचएलबीआई) की मेडिकल ऑफिसर पैट्रिस डेसविग-निकेंस ने कहा, “ये निष्कर्ष एचआईवी संक्रमित लोगों के लिए हृदय रोग जोखिम अनुमान मॉडल को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि इस अध्ययन में शामिल किए गए लोगों की विविधता के कारण, विभिन्न समूहों में इन भविष्यवाणियों की सटीकता का आकलन संभव हो पाया है। इस विविधता को सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए गए थे ताकि सभी जोखिम वाले लोगों को शामिल किया जा सके

मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल के मेटाबॉलिज्म यूनिट के प्रमुख स्टीवन ग्रिनस्पून ने कहा, “यह अध्ययन दिखाता है कि एचआईवी संक्रमित लोगों के लिए हृदय रोग के जोखिम का सही अनुमान लगाने के लिए क्षेत्र-विशिष्ट और आबादी-विशिष्ट मॉडल तैयार करना जरूरी है।”

–आईएएनएस

एएस/


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