भारतीय बाजारों को घरेलू निवेशकों का मजबूत सहारा, म्यूचुअल फंड ने बढ़ाया निवेश


मुंबई, 7 जनवरी (आईएएनएस)। वर्ष 2025 में देश के प्रमुख घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी संपत्तियों में 12 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की। इससे साफ है कि विदेशी निवेशकों की रफ्तार धीमी होने के बावजूद भारतीय इक्विटी और डेट मार्केट्स को घरेलू स्तर पर लगातार मजबूत समर्थन मिलता रहा।

आंकड़ों के मुताबिक, इस बढ़त में म्यूचुअल फंड्स ने सबसे अहम भूमिका निभाई। म्यूचुअल फंड की शेयरों में निवेश की गई संपत्ति 20.6 प्रतिशत बढ़कर 52.25 लाख करोड़ रुपए हो गई, जो एक साल पहले 43.34 लाख करोड़ रुपए थी। इक्विटी और डेट को मिलाकर म्यूचुअल फंड की कुल संपत्ति 23.34 प्रतिशत बढ़कर 73.21 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई।

आंकड़ों के अनुसार, म्यूचुअल फंड्स ने वर्ष 2025 में लगभग 4.88 लाख करोड़ रुपए के भारतीय शेयर खरीदे, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 4.3 लाख करोड़ रुपए था।

बीमा कंपनियों और घरेलू पेंशन फंडों की इक्विटी संपत्तियों में भी वृद्धि हुई, जिसमें बीमा कंपनियों की इक्विटी संपत्ति 12.6 प्रतिशत बढ़कर 26.81 लाख करोड़ रुपए हो गई। जबकि पेंशन फंड की इक्विटी संपत्तियों में 66 प्रतिशत की बड़ी बढ़त देखी गई और यह 4.38 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इन दोनों ने मिलकर साल भर में 1.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के भारतीय शेयर खरीदे।

इक्विटी और डेट को मिलाकर बीमा और पेंशन फंड की कुल संपत्ति में क्रमशः 12 प्रतिशत और 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। यह बढ़त लगातार निवेश और नियमों में दी गई ढील के कारण आई। पेंशन नियामक ने दूसरे और तीसरे स्तर की परसंपत्तियों के लिए इक्विटी लिमिट को बढ़ाने की अनुमति दी, वहीं बीमा नियामक ने सीमित दायरे में इक्विटी निवेश की छूट दी।

वैकल्पिक निवेश फंडों और बैंकों की इक्विटी परिसंपत्तियों में भी तेज बढ़ोतरी देखी गई। वैकल्पिक निवेश फंड की इक्विटी संपत्ति 37 प्रतिशत और बैंकों की 33 प्रतिशत बढ़ी। वहीं, इक्विटी और डेट मिलाकर इनकी कुल संपत्ति में क्रमशः 23 प्रतिशत और 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैकल्पिक निवेश फंड में बढ़ोतरी यह दिखाती है कि हाई-नेट-वर्थ वाले निवेशक और परिवार आधारित निवेश समूह बेहतर मुनाफे के लिए सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं।

इसके उलट, विदेशी निवेशकों की स्थिति कमजोर रही। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की इक्विटी संपत्ति में केवल 4.3 प्रतिशत की बढ़त हुई और यह 74.26 लाख करोड़ रुपए तक पहुंची। इक्विटी और डेट निवेश को मिलाकर उनकी कुल संपत्ति सिर्फ 4.8 प्रतिशत बढ़कर 81.4 लाख करोड़ रुपए हुई।

वर्ष 2025 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगभग 1.66 लाख करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जिसका कारण शेयरों के उच्च मूल्यांकन, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और भारतीय सामानों पर लगाए गए टैरिफ में बढ़ोतरी रही।

–आईएएनएस

डीबीपी/एबीएम


Show More
Back to top button