सैन्य संबंधों में मजबूतीः आर्मी ने नेपाली सेना को दिए 50 मिलिट्री यूटिलिटी वाहन

नई दिल्ली, 9 फरवरी (आईएएनएस)। भारत और नेपाल के बीच मजबूत रक्षा संबंध रहे हैं। भारतीय सेना ने इस रक्षा सहयोग को और अधिक मजबूती प्रदान करते हुए नेपाल की सेना को 50 सैन्य उपयोग वाले विशेष वाहन (मिलिट्री यूटिलिटी व्हीकल्स) सौंपे हैं। यह वाहन भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल सेना को हस्तांतरित किए गए।
भारतीय सेना ने सोमवार को इस संबंध में जानकारी दी और बताया कि इन वाहनों को काठमांडू में आयोजित एक औपचारिक समारोह के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा। नेपाल में भारत के राजदूत द्वारा औपचारिक रूप से यह पहल की जाएगी। भारतीय सेना का यह कदम दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को और गहराई देता है। यह कदम नेपाल सेना की क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) को सशक्त बनाने की दिशा में भारतीय सेना की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, यह दोनों सेनाओं के बीच मैत्री, आपसी विश्वास और घनिष्ठ सहयोग के मजबूत और स्थायी रिश्ते को भी रेखांकित करता है।
गौरतलब है कि भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में सहयोग इन द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास, उपकरण सहयोग और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में दोनों देश लगातार मिलकर काम कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल न केवल भारत-नेपाल के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करती है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
अभी दिसंबर महीने के दौरान ही भारत व नेपाल की सेना ने एक संयुक्त अभ्यास भी किया था। यहां बादलों के फटने, फ्लैश फ्लड, भूकंप से इमारतों के ढहने व नदी की तेज धारा में फंसे लोगों को निकालने की तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया था। दोनों सेनाओं द्वारा अंजाम दिए गए संयुक्त सैन्य अभ्यास का नाम ‘सूर्य किरण’ था। इस मॉड्यूल में दोनों देशों की सेनाओं को उन्नत स्तर की आपदा प्रबंधन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया था।
एनडीआरएफ के विशेषज्ञों ने अभ्यास के दौरान आपदा पर आधारित सटीक बचाव तकनीकों का प्रदर्शन किया था। इनमें बादलों के फटने या अचानक आने वाली फ्लैश फ्लड से बचाव के उपाय शामिल थे। साथ ही भूकंप से इमारतों के ढहने पर संरचनात्मक खोज एवं बचाव के तरीकों का प्रशिक्षण दिया गया। नदी-रेस्क्यू ऑपरेशन के अंतर्गत तेज धारा में फंसे लोगों को निकालने की तकनीक सिखाई गई। प्राकृतिक आपदाओं जैसी अन्य आपात स्थितियों में त्वरित मदद के तरीके बताए गए थे।
–आईएएनएस
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