सीईसीपी के तीसरे चरण की बैठक में शामिल हुए सिबी जॉर्ज, भारत-ईयू एफटीए को लेकर बधाई का सिलसिला जारी


नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। भारत-ईयू क्लीन एनर्जी एंड क्लाइमेट पार्टनरशिप (सीईसीपी) के तीसरे चरण की बैठक में विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज शामिल हुए। इस दौरान यूरोपीय कमीशन में ऊर्जा की डायरेक्टर जनरल डिट्टे जूल जॉर्गेनसन भी मौजूद रहीं। वहीं, भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुए एफटीए को लेकर तमाम यूरोपीय देशों की तरफ से बधाई संदेश आ रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने भारत-ईयू क्लीन एनर्जी एंड क्लाइमेट पार्टनरशिप (सीईसीपी) के तीसरे चरण के लॉन्च पर अपना संबोधन दिया। इस दौरान यूरोपीय कमीशन में ऊर्जा की डायरेक्टर जनरल डिट्टे जूल जॉर्गेनसन भी मौजूद रहीं। यह पहल ऐतिहासिक इंडिया-ईयू शिखर सम्मेलन में अपनाए गए भारत-ईयू संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा की समृद्धि और स्थिरता के स्तंभ में भारत-ईयू सहयोग को आगे बढ़ाएगा।”

भूटान में भारतीय दूतावास ने भारत-ईयू एफटीए को लेकर लिखा, “भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का पूरा होना भारत के वैश्विक व्यापार समझौते में एक बड़ी रणनीतिक सफलता है। इंडिया-ईयू एफटीए, भारत और 27 सदस्यों वाले ईयू ब्लॉक के बीच द्विपक्षीय आर्थिक एंगेजमेंट, व्यापार को मजबूत करने और रणनीतिक सहयोग में एक नया अध्याय है। इंडिया-ईयू ट्रेड पैक्ट में व्यापार, सेवा, व्यापार उपचार, रूल्स ऑफ ओरिजिन, कस्टम्स और ट्रेड फैसिलिटेशन जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ एसएमईएस और डिजिटल ट्रेड जैसे उभरते क्षेत्र भी शामिल हैं।”

भारतीय दूतावास ने आगे लिखा, “इस एफटीए के पूरा होने से भारत और यूरोपीय संघ भरोसेमंद साझेदार के तौर पर सामने आए हैं, जो ओपन मार्केट, प्रेडिक्टेबिलिटी और इनक्लूसिव ग्रोथ के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हिंदी भाषा में लिखा, “बहुत-बहुत धन्यवाद, प्रधानमंत्री जी। यह समझौता भारत के साथ हमारे आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा।”

इसके अलावा, भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुए व्यापार समझौते के एक दिन बाद अमेरिकी व्यापार के प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने कहा कि यह ऐतिहासिक एफटीए अमेरिका के नए आर्थिक दृष्टिकोण से बदल रहे ग्लोबल ट्रेड डायनामिक्स के बीच भारत को मजबूती से खड़ा करता है।

ग्रीर ने कहा, “सबसे पहले, रणनीतिक रूप से यह समझना जरूरी है कि क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने घरेलू प्रोडक्शन को प्राथमिकता दी है और असल में दूसरे देशों से हमारे मार्केट तक एक्सेस के लिए फीस लेना शुरू कर दिया है, इसलिए ये देश अपने ओवरप्रोडक्शन के लिए दूसरे आउटलेट्स खोजने की कोशिश कर रहे हैं। इस बदलाव ने बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स, खासकर यूरोपीय यूनियन को दूसरे एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन्स खोजने के लिए मजबूर किया है।”

उन्होंने आगे कहा, “इसलिए ईयू एक जगह खोजने की कोशिश के लिए भारत की ओर रुख कर रहा है। ईयू व्यापार पर इतना निर्भर है कि अगर वे अपना सारा सामान अमेरिका को नहीं भेज सकते, तो उन्हें दूसरे आउटलेट्स की जरूरत है।”

–आईएएनएस

केके/एबीएम


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