एससी-एसटी और ओबीसी समुदायों को यूजीसी के नाम पर धोखा दिया गया : स्वामी प्रसाद मौर्य


लखनऊ, 30 जनवरी (आईएएनएस)। यूजीसी गाइडलाइंस पर सुप्रीम कोर्ट के स्टे पर अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि एससी-एसटी और ओबीसी समुदायों को धोखा दिया गया।

लखनऊ में आईएएनएस से बातचीत में स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी पर जो भी फैसला दिया है, वह केंद्र सरकार की उदासीनता का दुष्परिणाम है। अगर भारतीय जनता पार्टी ने यूजीसी 2026 से जुड़े मामले में ठीक से विधिवत पैरवी की होती, इसका तर्क समझाया होता, और इसका औचित्य न्यायपालिका के सामने साफ तौर पर रखा होता, तो यह रोक नहीं लगाई जाती। लेकिन, गंभीर मुद्दे पर भाजपा ने पैरवी में कोताही की है, उसी के चलते स्टे मिला है। यूजीसी पर जो रोक लगी है, इसकी जवाबदेही भाजपा की है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से एससी-एसटी और ओबीसी समुदायों को यूजीसी के नाम पर धोखा दिया गया है। वह बहुत परेशान करने वाला है। आज भी उनके अधिकारों पर अन्याय थोपा जा रहा है और एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के साथ यह भेदभाव हर रूप में जारी है और भविष्य में भी जारी रहने की संभावना है। यह स्थिति बेहद दर्दनाक है और इसके लिए केंद्र सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक्स पोस्ट में कहा कि विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में हो रहे भेदभाव पर रोक लगाने के लिए यूजीसी के नए नियम के तहत एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के लोगों के आंख में धूल झोंकने में भाजपा सरकार एक बार फिर सफल हुई। भाजपा की नीति थी एक वे जहां यूजीसी के माध्यम से एससी-एसटी और ओबीसी को खुश करने की ढोंग कर रही थी, वहीं दूसरी ओर ऊंची जातियों से इसका विरोध भी करवा रही थी, जिसकी आशंका थी, वही हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियम पर रोक लगा दी।

उन्होंने कहा कि इसे कहते हैं शतरंज की चाल सांप भी मर गया लाठी भी नहीं टूटी। भाजपा के धोखे से सावधान रहने की जरूरत है।

–आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम


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