बायजू के कर्मचारियों के वेतन में फिर देरी, 8 अप्रैल तक मार्च का तनख्वाह मिलने की उम्मीद

बायजू के कर्मचारियों के वेतन में फिर देरी, 8 अप्रैल तक मार्च का तनख्वाह मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। वित्तीय संकट में फंसी एडटेक कंपनी बायजू ने लगातार दूसरे महीने कर्मचारियों के वेतन में देरी की है। उनका कहना है कि कुछ “गुमराह विदेशी निवेशकों” ने फरवरी के अंत में अदालत से एक अंतरिम आदेश प्राप्त किया था, जिसमें राइट्स इश्यू के माध्यम से जुटाये गये धन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

कंपनी प्रबंधन ने सोमवार को कर्मचारियों को भेजे गये एक ईमेल में कहा, “हमें आपको यह बताते हुए खेद है कि वेतन के वितरण में फिर से देरी होगी।”

आईएएनएस द्वारा देखे गये इस ईमेल में कंपनी प्रबंधन ने कहा, “हमें भारतीय न्यायिक प्रणाली पर पूरा भरोसा है और हम उत्सुकता से एक अनुकूल परिणाम का इंतजार कर रहे हैं जो हमें राइट्स इश्यू के माध्यम से जुटाए गए धन का उपयोग करने और उन वित्तीय चुनौतियों को कम करने में सक्षम बनायेगा जिनका हम वर्तमान में सामना कर रहे हैं।”

एडटेक कंपनी ने गंभीर नकदी संकट के बीच ऑफ़लाइन ट्यूशन सेंटरों को छोड़कर देश भर में सभी ऑफिस बंद कर दिये हैं और कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य कर दिया है।

बायजू के निदेशक मंडल ने पिछले शुक्रवार को राइट्स इश्यू के जरिए पूंजी जुटाने के लिए अपनी अपनी असाधारण आम बैठक (ईजीएम) बुलाई थी। कुछ प्रमुख निवेशक राइट्स इश्यू के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) चले गए हैं।

कर्मचारियों को लिखे पत्र में आगे कहा गया है कि अदालत के फैसले की परवाह किए बिना “हम यह सुनिश्चित करने के लिए एक समानांतर क्रेडिट लाइन पर काम कर रहे हैं कि आपको 8 अप्रैल तक अपना वेतन मिल जाए”।

पत्र में कहा गया है, “सकारात्मक बात यह है कि हमारे पास राइट्स इश्यू के लिए अधिकृत पूंजी बढ़ाने के लिए आवश्यक वोट है। इसका मतलब है कि जुटाई गई धनराशि के उपयोग पर एक बार प्रतिबंध हट जाने के बाद हम अपनी सभी वेतन प्रतिबद्धताओं को तुरंत पूरा कर सकते हैं।”

कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ बायजू रवींद्रन ने “असंतुष्ट निवेशकों से सहयोगात्मक भावना से” अपील की है।

कंपनी ने अपने कर्मचारियों से कहा है, “हम उम्मीद कर रहे हैं कि मुकदमेबाज़ी करने वाले निवेशकों में हमारे दैनिक जीवन को अब और निराश न करने की उचित भावना होगी। हम इन परिस्थितियों के कारण उत्पन्न असहायता की भावनाओं को समझते हैं, और हम आपकी निराशा मे भागीदार हैं।”

–आईएएनएस

एकेजे/

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