बांग्लादेश में खाद्य महंगाई की ‘रेड’ स्थिति बरकरार, हालिया वृद्धि से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों और वर्ल्ड बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश लगभग पिछले तीन वर्षों से भी उन अर्थव्यवस्थाओं की ‘रेड’ श्रेणी में बना हुआ है, जहां खाद्य असुरक्षा और महंगाई का जोखिम उच्च स्तर पर है।
हालांकि, सरकार की अलग-अलग कोशिशों की वजह से कुल महंगाई कुछ कम हुई है, लेकिन पिछले पांच महीनों में खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई फिर से बढ़ गई है।
ढाका के अखबार प्रोथोम आलो के अनुसार, हाल ही में प्रकाशित विश्व बैंक की एक रिपोर्ट ने पिछले दस महीनों में उच्च खाद्य महंगाई के कारण बांग्लादेश की ‘रेड’ स्थिति को उजागर किया है। इसका अर्थ है कि देश में खाद्य असुरक्षा का जोखिम कम नहीं हो रहा है और मध्य पूर्व संकट के कारण यह और बढ़ सकता है।
बांग्लादेश के अलावा 13 अन्य देश भी पिछले दस महीनों से रेड श्रेणी में बने हुए हैं। इन देशों में इथियोपिया, मोजाम्बिक, अंगोला, घाना, मंगोलिया, नाइजीरिया, ट्यूनीशिया, यूक्रेन, जाम्बिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, मोल्दोवा और रूस शामिल हैं।
निजी शोध संस्थान साउथ एशियन नेटवर्क ऑन इकोनॉमिक मॉडलिंग (एसएएनईएम) के कार्यकारी निदेशक सलीम रायहान ने प्रोथोम आलो को बताया कि खाद्य महंगाई में वृद्धि काफी चिंताजनक है। यदि मध्य पूर्व संकट लंबा चलता है, तो इसका असर देश के आयात पर पड़ेगा, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है।
रायहान ने यह भी कहा कि पड़ोसी देशों की तुलना में बांग्लादेश महंगाई कम करने में काफी असफल रहा है। सरकारी एजेंसियों के अनुसार महंगाई दर 8.5 प्रतिशत से 9 प्रतिशत के बीच है, लेकिन वास्तविकता में यह इससे भी अधिक है।
बांग्लादेश सांख्यिकी ब्यूरो (बीबीएस) ने फरवरी तक के महंगाई के आंकड़े दिए, जबकि विश्व बैंक की रिपोर्ट पिछले नवंबर तक के डेटा पर आधारित थी। बीबीएस के अनुसार फरवरी में खाद्य महंगाई 9.3 प्रतिशत रही, जो पिछले 13 महीनों में सबसे अधिक है।
पिछले तीन वर्षों से खाद्य महंगाई काफी अधिक बनी हुई है। पहले, गरीब और सीमित आय वाले लोगों को इतनी लंबी अवधि तक ऐसे कठिन हालात का सामना नहीं करना पड़ा था।
गरीब लोगों की आय का बड़ा हिस्सा भोजन खरीदने में खर्च होता है। महंगाई के दौरान वे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
विश्व बैंक की लिस्ट में शामिल खाने-पीने की चीज़ों की ज़्यादा महंगाई वाले दूसरे देश पिछले एक साल के दौरान रेड, पर्पल, येलो और ग्रीन कैटेगरी के बीच आते-जाते रहे हैं। कुछ ने अपनी खाद्य मुद्रास्फीति की स्थिति में सुधार किया है, जबकि दूसरों की स्थिति और बिगड़ गई है।
–आईएएनएस
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