आरबीआई ने ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए डिजिटल वॉलेट्स हेतु कड़े नियमों का प्रस्ताव रखा


नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड कार्ड के लिए सुरक्षा, ग्राहक सुरक्षा और परिचालन स्पष्टता को बढ़ाने के उद्देश्य से प्रीपेड भुगतान उपकरणों (पीपीआई) पर एक मसौदा ‘मास्टर निर्देश’ जारी किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरबीआई के ड्राफ्ट के तहत, डेबिट कार्ड जारी करने वाले बैंक, ‘पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम विभाग’ (डीपीएसएस) को जानकारी देने के बाद पीपीआई (प्री-पेड इंस्ट्रूमेंट्स) जारी कर सकेंगे।

ड्राफ्ट में कहा गया है, “किसी भी गैर-बैंकिंग आवेदक की न्यूनतम नेट-वर्थ 5 करोड़ रुपए होनी चाहिए, और उसे अपने वैधानिक ऑडिटर से एक प्रमाणपत्र जमा करना होगा।”

केंद्रीय बैंक ने इस प्रस्ताव पर 22 मई, 2026 तक आम लोगों से सुझाव मांगे हैं। इसके अलावा, किसी भी गैर-बैंकिंग पीपीआई जारीकर्ता को अनुमति मिलने के तीसरे वित्तीय वर्ष के अंत तक अपनी न्यूनतम नेट-वर्थ बढ़ाकर 15 करोड़ रुपए करनी होगी।

इस प्रस्ताव में गैर-बैंकिंग पीपीआई जारीकर्ताओं के लिए यह भी अनिवार्य किया गया है कि वे पीपीआई जारी करने के बदले जमा की गई राशि को एक अलग ‘रुपया एस्क्रो खाते’ में रखें, जो भारत में किसी वाणिज्यिक बैंक में खोला गया हो।

प्रस्तावित सीमाओं के तहत, सामान्य उपयोग वाले पीपीआई में अधिकतम 2 लाख रुपए की राशि जमा रखी जा सकती है, और इसमें हर महीने 10,000 रुपए तक नकद राशि जमा करने की सीमा तय की गई है।

ड्राफ्ट में कहा गया है कि ऐसे पीपीआई की अधिकतम सीमा 10,000 रुपए तक हो सकती है, और ‘ट्रांजिट पीपीआई’ (परिवहन संबंधी पीपीआई) के मामले में यह सीमा 3,000 रुपए तक हो सकती है।

आरबीआई के ड्राफ्ट में कहा गया है, “ऐसे पीपीआई में राशि जमा करने की अनुमति तभी होगी, जब उसके बदले नकद या किसी अन्य भुगतान माध्यम से विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई हो। किसी भी महीने के दौरान ऐसे पीपीआई से कुल 5 लाख रुपए से अधिक की राशि नहीं निकाली जा सकेगी।”

ड्राफ्ट के अनुसार, पीपीआई जारीकर्ताओं के लिए यह अनिवार्य है कि वे पीपीआई जारी करते समय उपयोगकर्ताओं को इसकी सभी विशेषताओं, संबंधित शुल्कों, वैधता अवधि और नियमों व शर्तों के बारे में स्पष्ट रूप से जानकारी दें। यह जानकारी सरल भाषा में दी जानी चाहिए, और बेहतर होगा कि यह अंग्रेजी, हिंदी और स्थानीय भाषा में उपलब्ध हो।

लेन-देन के असफल होने, राशि वापस आने, लेन-देन रद्द होने या अस्वीकृत होने की स्थिति में, संबंधित पीपीआई खाते में राशि तुरंत वापस (रिफंड) जमा की जानी चाहिए; भले ही ऐसा करने से उस विशिष्ट पीपीआई श्रेणी के लिए निर्धारित सीमा का उल्लंघन होता हो।

–आईएएनएस

एससीएच


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