पंजाब कांग्रेस ने 'मनरेगा बचाओ संग्राम' का शुभारंभ किया


चंडीगढ़, 8 जनवरी (आईएएनएस)। पंजाब कांग्रेस ने गुरुवार को महात्मा गांधी के नाम पर स्थापित ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को पुनर्जीवित करने की मांग के लिए पार्टी द्वारा घोषित ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के पहले चरण का शुभारंभ किया।

इस ‘संग्रह’ की शुरुआत गुरदासपुर कस्बे में एक रैली से हुई, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और हजारों श्रमिकों, मजदूरों, किसानों और समाज के वंचित वर्गों ने भाग लिया।

कांग्रेस नेताओं ने अपने संकल्प को दोहराया कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को मनरेगा को पुनर्जीवित करने और नए कानून ‘वीबी-जी राम जी’ को वापस लेने के लिए मजबूर किया जाएगा, ठीक उसी तरह जैसे उसे तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए मजबूर किया गया था।

इस अवसर पर बोलते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब के प्रभारी पार्टी महासचिव भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस ही वह पार्टी है जिसने हमेशा मेहनतकश लोगों और समाज के वंचित वर्गों के हित में निर्णय लिए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मार्गदर्शन में 2005 में शुरू की गई मनरेगा योजना को न केवल देश में मान्यता मिली, बल्कि इसे विश्व स्तर पर ‘गरीब-समर्थक’ योजना के रूप में सराहा और प्रशंसा मिली।

बघेल ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा इस योजना को रद्द किए जाने के बाद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कांग्रेस नेतृत्व ने उन मजदूरों और हाशिए पर पड़े वर्गों की आवाज बनने का फैसला किया।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री ने पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह वास्तव में भाजपा की “बी-टीम” है।

उन्होंने कहा कि आप सरकार ने ग्रामीण गरीबों को रोजगार प्रदान करने के लिए अपने अपेक्षित योगदान का 10 प्रतिशत भी नहीं दिया है।

इस अवसर पर बोलते हुए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनरेगा के प्रति पहले दिन से ही अपनी शत्रुता प्रकट कर दी थी और इसे एक विफलता बताया था।

लेकिन उन्होंने आगे कहा कि सच्चाई यह है कि मनरेगा योजना को विश्व स्तर पर सर्वश्रेष्ठ ग्रामीण रोजगार सृजन योजना के रूप में स्वीकार किया गया है।

उन्होंने कहा कि इसने ग्रामीण गरीबों को सम्मान प्रदान किया है और लोगों की व्यय क्षमता में वृद्धि होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में भी मदद मिली है।

–आईएएनएस

एमएस/


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