पुडुचेरी भारत का प्रमुख समुद्री निर्यात द्वार बन सकता है: उपराज्यपाल कैलाशनाथन

पुडुचेरी, 12 फरवरी (आईएएनएस)। पुडुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में भारत का प्रमुख समुद्री निर्यात द्वार बनने और मॉडल मरीन इकोनॉमी के रूप में विकसित होने की पूरी क्षमता है, बशर्ते मूल्य संवर्धन को मजबूत किया जाए और मत्स्य अवसंरचना का आधुनिकीकरण किया जाए।
‘बे ऑफ बंगाल क्षेत्र में समुद्री मत्स्य मूल्य श्रृंखला: पुडुचेरी एक गंतव्य’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि पुडुचेरी की तटीय रेखा, बंदरगाह संपर्क, कुशल मानव संसाधन और विकसित होता प्रोसेसिंग इकोसिस्टम इसे विशेष बढ़त देते हैं।
उन्होंने कहा, “कारैकल भारत के पूर्वी तट पर एकमात्र बंदरगाह-केन्द्रित उत्पादन और प्रसंस्करण हब है। देश के लगभग 97 प्रतिशत निर्यात बंदरगाहों के माध्यम से होते हैं, ऐसे में पुडुचेरी एक प्रमुख निर्यात द्वार के रूप में उभर सकता है।”
इस कार्यशाला का आयोजन बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम इंटर-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइजेशन (बीओबीपी-आईजीओ) और पुडुचेरी सरकार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। इसमें खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), आईसीएआर- केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान और राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड सहित कई संस्थाएं सहयोग कर रही हैं।
उपराज्यपाल ने कहा कि केवल मछली पकड़ने की मात्रा बढ़ाने से मछुआरों की समृद्धि सुनिश्चित नहीं होगी। उन्होंने कहा, “यदि मछुआरा समुदाय की आय बढ़ानी है, तो प्रत्येक किलोग्राम मछली से प्राप्त मूल्य को बढ़ाना होगा।”
उन्होंने आधुनिक कोल्ड चेन प्रणाली, आइस प्लांट, उन्नत मछली लैंडिंग सेंटर, प्रमाणन व्यवस्था और निर्यात-उन्मुख अवसंरचना की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि घरेलू और वैश्विक बाजार में बेहतर कीमत मिल सके।
कैलाशनाथन ने बताया कि पुडुचेरी सरकार केंद्र के सहयोग से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) जैसी योजनाओं के तहत सुधार लागू कर रही है। इनमें बंदरगाह विकास, सुरक्षा उपकरण, मछुआरों के लिए बीमा, जीपीएस सुविधा, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा और महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रशिक्षण शामिल है।
उन्होंने पुडुचेरी की महिला मत्स्य सहकारी समितियों को राष्ट्रीय मॉडल बताते हुए कहा कि महिलाएं मछली सुखाने, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्हें बेहतर ऋण सुविधा, कौशल प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव की जरूरत है।
इस कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, शोधकर्ता, सहकारी समितियां और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जो बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री मत्स्य मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करने की व्यापक रणनीति तैयार करेंगे।
–आईएएनएस
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