माता-पिता ही बच्चे के जीवन के पहले और सबसे प्रभावशाली थेरेपिस्ट होते हैं: डॉ. वीरेंद्र कुमार

नई दिल्ली, 23 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर-40 स्थित राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीआईडी), क्षेत्रीय केंद्र में क्रॉस डिसेबिलिटी अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (सीडीईआईसी) का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चे के जीवन में पहले और सबसे प्रभावशाली थेरेपिस्ट होते हैं और जब वे सही ज्ञान और समर्थन से सशक्त होते हैं, तो विकासात्मक देरी से पीड़ित कोई भी बच्चा कभी पीछे नहीं रहेगा। समावेशी और प्रारंभिक सहायता प्रणालियों के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए मंत्री ने रेखांकित किया कि प्रारंभिक बाल्यावस्था हस्तक्षेप केवल एक सेवा नहीं है, बल्कि प्रत्येक बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने के की एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।
प्रारंभिक हस्तक्षेप की परिवर्तनकारी शक्ति पर प्रकाश डालते हुए डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि जीवन के पहले छह वर्ष मस्तिष्क के विकास तथा स्वास्थ्य, सीखने और सामाजिक सहभागिता से जुड़े आजीवन परिणामों के लिए निर्णायक होते हैं। उन्होंने कहा कि सीडीईआईसी जैसे केंद्र सरकार के इस संकल्प का प्रतीक हैं कि बच्चों तक सबसे प्रारंभिक चरण में पहुंचकर समयबद्ध, वैज्ञानिक और करुणामय सहयोग सुनिश्चित किया जाए। नोएडा स्थित केंद्र को उत्कृष्टता के एक मॉडल के रूप में विकसित करने का निर्देश देते हुए, मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि गुणवत्ता केवल अवसंरचना और सौंदर्य तक सीमित न रहे बल्कि उन्नत प्रौद्योगिकी, दक्ष पेशेवरों और प्रमाण- आधारित पद्धतियों में भी परिलक्षित हो। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि परिवार, विशेषकर माता-पिता और देखभालकर्ता, सफल प्रारंभिक हस्तक्षेप के केंद्र में होते है तथा केन्द्र को नियमित, संरचित देखभालकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रमाणन सहित आयोजित करने का निर्देश दिया, ताकि परिवारों को बच्चे की विकासात्मक यात्रा में समान भागीदार के रूप में सशक्त बनाया जा सके।
अपने विजन का संक्षेप में उल्लेख करते हुए मंत्री महोदय ने दोहराया कि पेशेवरों, संस्थानों और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्लूडी) के संयुक्त प्रयासों से सीडीईआईसी को आशा, विश्वास और नवाचार के केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि मंत्रालय प्रारंभिक हस्तक्षेप सेवाओं को निरंतर सुदृढ़ करता रहेगा ताकि विकासात्मक विलंब और दिव्यांगता से ग्रस्त बच्चे अपनी पूर्ण क्षमता प्राप्त कर सकें और समाज में सार्थक सहभागिता कर सकें।
इस अवसर पर बोलते हुए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की अपर सचिव मनमीत कौर नंदा ने देश भर में क्रॉस डिसेबिलिटी अर्ली इंटरवेंशन सेंटर्स (सीडीईआईसी) के निरंतर विस्तार पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नोएडा में नव-उद्घाटित केंद्र विभाग के अंतर्गत स्थापित 28वां सीडीईआईसी है, जो प्रारंभिक पहचान और हस्तक्षेप के प्रति मंत्रालय के केंद्रित एवं सतत दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने एनआईईपीआईडी की टीम को उच्च स्तरीय, बाल-केंद्रित तथा परिवार-उन्मुख सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया और देश भर में इन केंद्रों को समर्थन एवं सुदृढ़ करने के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता दोहराई।
नोएडा स्थित सीडीईआईसी को विकासात्मक विलंब तथा अन्य विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए समग्र, बहु-विषयक सेवाएं प्रदान करने हेतु डिजाइन किया गया है। यह केंद्र व्यावसायिक चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, वाक् चिकित्सा, चिकित्सा परामर्श, विशेष शिक्षा, पारिवारिक परामर्श तथा विद्यालय-तैयारी संबंधी हस्तक्षेप जैसी सेवाएं उपलब्ध कराएगा, जिससे एक ही जगह समग्र देखभाल संभव हो सके। अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह केंद्र नोएडा और आसपास के क्षेत्रों के 0-6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की एक बड़ी आबादी की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा।
इस यात्रा के दौरान मंत्री महोदय एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने सीडीईआईसी सुविधाओं, मॉडल विशेष शिक्षा केंद्र, मॉडल समावेशी प्राथमिक विद्यालय और एनआईईपीआईडी क्षेत्रीय केंद्र का दौरा किया। उन्होंने मोबाइल थेरेपी बस और पीएमडीके सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। कार्यक्रम में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों द्वारा एक जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई, साथ ही एनआईईपीआईडी दिशा पाठ्यक्रम सामग्री का वितरण किया गया और लाभार्थियों को सहायक उपकरण, यंत्र और शिक्षण-अधिगम सामग्री भी प्रदान की गई।
इस कार्यक्रम का समापन केंद्रीय मंत्री और अपर सचिव के नेतृत्व में वृक्षारोपण अभियान के साथ हुआ, जो विकास, स्थिरता, समय पर देखभाल और सामूहिक उत्तरदायित्व के माध्यम से प्रत्येक बच्चे की क्षमता के पोषण के साझा संकल्प का प्रतीक है।
–आईएएनएस
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