भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए बांग्लादेश का इस्तेमाल कर रहा है पाकिस्तान: रिपोर्ट


ढाका, 19 जनवरी (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश को यह समझने की जरूरत है कि पाकिस्तान की बढ़ती दखलअंदाजी उसके निहित स्वार्थों से प्रेरित है, जिसका मकसद बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल कर भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाना है। रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद बांग्लादेश के भीतर आतंकवाद को बढ़ावा देने के दुष्परिणामों को लेकर चिंतित नहीं दिखता।

रिपोर्ट में कहा गया कि भले ही ढाका इस समय इस्लामाबाद के साथ बढ़ती नजदीकियों का जश्न मना रहा हो, लेकिन उसे सतर्क रहना चाहिए ताकि उसकी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए लॉन्च पैड के रूप में न किया जा सके।

यूरेशिया रिव्यू में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, करीब साढ़े पांच दशक पहले पाकिस्तान की सेना ने तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ नाम से सैन्य अभियान चलाया था। बांग्लादेश की राष्ट्रीय विश्वकोश ‘बांग्लापीडिया’, जिसे 1,450 से अधिक विद्वानों की बौद्धिक कृति बताया जाता है, इस सैन्य कार्रवाई को “25 मार्च 1971 को पाकिस्तानी शासकों के तानाशाही शासन के खिलाफ स्वतंत्रता चाहने वाले बंगालियों के आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना द्वारा चलाया गया निर्दयी और क्रूर सशस्त्र अभियान” के रूप में वर्णित करती है।

रिपोर्ट में कहा गया कि इस अभियान के दौरान पाकिस्तानी सेना और उसके द्वारा गठित ईस्ट पाकिस्तान सेंट्रल पीस कमेटी, जिसमें इस्लामी जमात-ए-इस्लामी (जेआई) पार्टी भी शामिल थी, ने आम लोगों के खिलाफ अत्यंत बर्बरता दिखाई। रावलपिंडी द्वारा पूर्वी पाकिस्तान में विदेशी मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के कारण सेना के जवानों को किसी तरह का भय नहीं था और उन्होंने इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए स्थानीय लोगों पर अकल्पनीय अत्याचार किए।

रिपोर्ट के अनुसार, 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना की क्रूरता बांग्लादेश के अलग होने और स्वतंत्र राष्ट्र बनने से रोक नहीं सकी, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान ने “जनसमुदाय के इस्लामीकरण” के प्रयास जारी रखे, ताकि पश्चिमी पाकिस्तान के साथ एक मजबूत धार्मिक संबंध कायम किया जा सके।

रिपोर्ट में जोर दिया गया कि बांग्लादेश में मौजूदा परिस्थितियों ने कट्टरपंथी इस्लामी समूहों के लिए अपनी पकड़ मजबूत करना आसान बना दिया है, और पाकिस्तान ने इस कमजोरी का पूरी तरह से फायदा उठाया है।

इसमें कहा गया है कि रावलपिंडी भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने के साथ-साथ भारत को निशाना बनाने के लिए आतंकी संगठनों के एक समूह को संगठित कर रहा है। ऐसे में नई दिल्ली को न केवल इस संभावित खतरे के लिए तैयार रहना चाहिए, बल्कि इससे निपटने के लिए सक्रिय रणनीति भी अपनानी चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया कि बांग्लादेश की अगली सरकार को अतीत से सबक लेते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए कि धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने वाला राजनीतिक संरक्षण पनपने न पाए। इसमें चेतावनी दी गई कि धार्मिक उग्रवाद को नियंत्रित या समाप्त करना आसान नहीं है, और पाकिस्तान इसका जीवंत उदाहरण है।

–आईएएनएस

डीएससी


Show More
Back to top button