एक्साइज ड्यूटी में कटौती को विपक्ष ने बताया चुनावी स्टंट, बोला-स्थायी समाधान जरूरी


नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)।पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए की कटौती को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। जहां एक ओर सरकार के इस फैसले को आम जनता को राहत देने वाला कदम बताया जा रहा है, वहीं विपक्षी दल इसे राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया कदम बता रहे हैं।

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इससे आम लोगों को वास्तविक फायदा कितना मिलेगा। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार को केवल दिखावटी राहत देने के बजाय स्थायी समाधान पर ध्यान देना चाहिए।

कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि यह कदम पूरी तरह राजनीतिक है। सरकार एक तरफ एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर रही है, जबकि दूसरी तरफ अन्य तरीकों से जनता पर आर्थिक बोझ डालकर इसकी भरपाई की जा सकती है। उन्होंने इसे राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश बताया।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह कदम ऐसा है, जैसे पहले जनता से अधिक वसूली की जाए और फिर थोड़ी राहत देकर उसे बड़ा एहसान बताया जाए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी कम थीं, जबकि मौजूदा सरकार में इनकी कीमतों में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती को जनता पर एहसान के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि वास्तव में यह पहले से लगाए गए “अनावश्यक” टैक्स का आंशिक कम होना भर है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में कई बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई है।

आम आदमी पार्टी के सांसद अशोक मित्तल ने भी इस फैसले को चुनावी रणनीति से जोड़ते हुए कहा कि यह कदम उन राज्यों में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। उन्होंने इसे समयानुकूल लेकिन राजनीतिक रूप से प्रेरित निर्णय बताया।

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद मियां अल्ताफ अहमद लारवी ने इस फैसले को राहत देने वाला बताया। उनका कहना है कि अगर यह कटौती नहीं की जाती, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और बढ़ सकती थीं, जिससे उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ता।

इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर के लिए 5,000 करोड़ रुपए के अतिरिक्त वित्तीय पैकेज को मंजूरी देने का भी लारवी ने स्वागत जताया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में रुके हुए विकास कार्यों को गति मिलेगी और लंबे समय से लंबित कर्मचारियों के बकाया भुगतान जैसे मुद्दों का समाधान हो सकेगा।

–आईएएनएस

एसएके/वीसी


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