राहुल गांधी और रवनीत बिट्टू मामले पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, 'न आपसी तालमेल है, न बीच का रास्ता और न ही संवाद'

नई दिल्ली, 5 फरवरी (आईएएनएस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को ‘गद्दार’ कहे जाने के मामले पर शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रतिक्रिया दी।
प्रियंका चतुर्वेदी ने आईएएनएस से कहा कि यह पूरा मामला लोकसभा सत्र के दौरान बने तनावपूर्ण माहौल को दर्शाता है, जहां कड़वाहट और टकराव चरम पर है।
उन्होंने कहा, ”संसद में जो कुछ हो रहा है, वही इस बयानबाजी में भी दिखता है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े हैं। न आपसी तालमेल है, न बीच का रास्ता और न ही संवाद।”
प्रियंका चतुर्वेदी ने माना कि संसद परिसर में जो कुछ हुआ, वह उसी माहौल का प्रतिबिंब था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दुर्भाग्यवश दोनों तरफ से अनुचित शब्दों का इस्तेमाल किया गया।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी प्रियंका चतुर्वेदी ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रूस क्या कहेगा, यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना यह समझना जरूरी है कि भारत ने अपने रणनीतिक हितों को एक तरफ रखकर ऐसा व्यापार समझौता क्यों किया, जिसमें ऐसा लगता है कि भारत को अमेरिका के निर्देशों पर रूस से तेल न खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
उन्होंने संकेत दिया कि इस सौदे से भारत की स्वतंत्र विदेश नीति पर सवाल खड़े होते हैं।
एसआईआर के मुद्दे पर बोलते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जब इसे लागू किया गया था, तब उद्देश्य चुनाव आयोग को मतदाता सूची में पारदर्शिता लाने और मृत या फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने की जिम्मेदारी देना था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब चुनाव आयोग ने एसआईआर को मतदाताओं के अधिकारों को सीमित करने का साधन बना दिया है। इस प्रक्रिया में वैध मतदाताओं के नाम भी हटाए जा रहे हैं।
वहीं, लखनऊ में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थन करते हुए भाजपा पर चुनावों में हेरफेर का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “भाजपा एसआईआर के बहाने लगातार चुनावों में गड़बड़ी कर रही है। हमने यह सिर्फ बंगाल में ही नहीं, बल्कि असम और देश के अन्य हिस्सों में भी देखा है।”
अशुतोष वर्मा ने कहा कि जब भी कोई विपक्षी दल या इंडिया ब्लॉक का कोई दल शिकायत करता है, तो चुनाव आयोग की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिलता। उन्होंने इसे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि एक निर्वाचित मुख्यमंत्री, जिसने लगातार तीन कार्यकाल पूरे किए हों, उसे सुप्रीम कोर्ट जाकर खुद का बचाव करना पड़ रहा है।
–आईएएनएस
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