म्यांमार की नई सरकार को रुपया-क्यात व्यापार विस्तार पर देना चाहिए जोर: रिपोर्ट


नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। म्यांमार में नए राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के पदभार संभालने के साथ ही देश को भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को “लेन-देन की भावना” के तहत आगे बढ़ाना चाहिए और भारतीय रुपया-क्यात व्यापार व्यवस्था का विस्तार करना चाहिए। यह बात एक नई रिपोर्ट में कही गई है।

द सचिवालय की रिपोर्ट के अनुसार, नई सरकार के गठन से भारत-म्यांमार संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। म्यांमार, भारत की तीन प्रमुख विदेश नीति पहलों “एक्ट ईस्ट”, “नेबरहुड फर्स्ट” और “इंडो-पैसिफिक” के केंद्र में स्थित है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मानना गलत है कि म्यांमार पूरी तरह चीन की ओर झुका हुआ है। राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग भारत, चीन और रूस के साथ संतुलन बनाए रखने में सक्षम हैं। नई सत्ता संरचना भारत के लिए सहयोग के नए अवसर खोल सकती है और नई दिल्ली को संसाधन-समृद्ध म्यांमार में अपनी आर्थिक मौजूदगी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत और म्यांमार के संबंध गहरे ऐतिहासिक और भौगोलिक जुड़ाव पर आधारित हैं। केवल सुरक्षा-आधारित साझेदारी सीमित साबित हो सकती है, इसलिए राजनीतिक संवाद को भी साथ लेकर चलना जरूरी है।

भारत ने म्यांमार के आंतरिक संकट के समाधान के लिए ‘म्यांमार-नेतृत्व, म्यांमार-स्वामित्व’ वाले दृष्टिकोण का समर्थन किया है। साथ ही, प्राकृतिक आपदाओं जैसे चक्रवात मोचा, टाइफून यागी और मांडले भूकंप के दौरान भारत ने त्वरित सहायता देकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत चाहता है कि म्यांमार में शांति और स्थिरता कायम हो, हिंसा रुके और सभी मुद्दों का समाधान संवाद के जरिए निकले। भारत ने म्यांमार के लोकतांत्रिक परिवर्तन में भी सहयोग किया है और विभिन्न पक्षों के साथ क्षमता निर्माण व अनुभव साझा करने पर काम किया है।

इसके अलावा, भारत के लिए म्यांमार का सहयोग कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में जरूरी है, जो फिलहाल धीमी गति से प्रगति कर रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन और दवा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाकर जनवरी 2024 से लागू रुपया-क्यात व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। इसके तहत भारत से निर्यात बढ़ाया जा सकता है, जबकि म्यांमार अपने बीन्स और दालों का निर्यात रुपये में कर सकता है।

–आईएएनएस

डीएससी


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