मौलाना चौधरी इफ़रहीम हुसैन ने उठाई फिल्म 'गोदान' पर रोक की मांग, फिल्म पर लगाया भेदभाव का आरोप

अलीगढ़, 6 फरवरी (आईएएनएस)। गोरक्षा को समर्पित फिल्म ‘गोदान’ आज यानी 6 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है, लेकिन रिलीज से पहले से ही फिल्म को विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
गोदान गो रक्षा और गो महत्व को दिखाती फिल्म है जिसमें गो तस्करी को मार्मिक तरीके से पर्दे पर दिखाया गया है, लेकिन फिल्म के कुछ सीन्स का विरोध हो रहा है, जिसमें विशेष समुदाय को टारगेट करने का आरोप लग रहा है। अब मौलाना चौधरी इफ़रहीम हुसैन ने फिल्म का विरोध किया है और सेंसर बोर्ड से फिल्म पर रोक लगाने की मांग की है।
फिल्म ‘गोदान’ पर आईएएनएस से बातचीत में मौलाना चौधरी इफ़रहीम हुसैन ने कहा, “मैं फिल्म ‘गोदान’ के बारे में आ रही खबरों की कड़ी निंदा करता हूं, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यह मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाती है, जिसमें टोपी पहने एक व्यक्ति पर बंदूक ताने जाने के दृश्य और आपत्तिजनक टिप्पणियां शामिल हैं। मैं इस मुद्दे पर मौलाना इशाक साहब द्वारा उठाई गई आपत्ति का समर्थन करता हूं। कहीं न कहीं, कुछ फिल्म निर्माता अपने फायदे के लिए ऐसी सामग्री पेश करने की कोशिश करते हैं, भले ही इससे समाज में विभाजन पैदा हो या किसी विशेष समुदाय, जाति या धर्म के लोगों का अपमान हो, उन्हें इसकी परवाह नहीं होती।”
उन्होंने आगे कहा, “ऐसा नफरत भरा कंटेंट बनाने वाले फिल्म निर्माताओं पर रोक लगानी चाहिए। ऐसी फिल्में विशेष धर्म के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं और अपमानित करती हैं। मेरा सेंसर बोर्ड से भी अनुरोध है कि ऐसी फिल्मों को पास न किया जाए और आज जनता भी समाज को बांटने वाली फिल्मों का बहिष्कार करे।”
इससे पहले उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व प्रदेश प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने भी फिल्म का विरोध किया और फिल्म को समाज में नफरत फैलाने का एजेंडा बताया। उन्होंने कहा था कि फिल्म समाज में भेदभाव की भावना फैलाती है और दो समुदाय के बीच नफरत पैदा करने का काम करती है। ऐसी फिल्मों पर बैन लगने की जरूरत है। वहीं कांग्रेस नेता पूनम पंडित ने कहा, फिल्म ‘गोदान’ आ रही है, जिसमें हमारी पूर्व प्रधानमंत्री, लौह महिला और भारत रत्न इंदिरा गांधी को गलत तरीके से चित्रित किया गया है, मानो गौ-अत्याचार के लिए वे स्वयं जिम्मेदार थीं। इस तरह की बातें दिखाई गई हैं।”
–आईएएनएस
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