दो बेबी स्टार्स के पास मिला मार्गरीटा कॉकटेल बनाने वाला पदार्थ

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) ने अपने इंस्टाग्राम (Instagram) अकाउंट पर एक पोस्ट किया। पोस्ट तारों और ग्रहों के बनने के बारे में था (Origin of stars and planets)। पोस्ट में स्पेस की भव्य तस्वीर थी। पोस्ट में ऐसा कहा गया था कि स्पेस में जेम्स वेब टेलीस्कोप (James Webb Telescope) ने मार्गरीटा और विनेगर के कुछ तत्व खोजे हैं। मार्गरीटा (Margarita) मतलब वही कॉकटेल जो टकीला शराब और नींबू वगैरह मिलाकर बनाया जाता है। ये भी कहा जा रहा है कि ये जीवन की शुरुआत की ओर एक कदम हो सकता है।

अंतरिक्ष में मिला कॉकटेल बनाने वाला मार्गरीटा?

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप का उपयोग करने वाले खगोलविदों को अंतरिक्ष में मार्गरीटा कॉकटेल बनाने के लिए आवश्यक प्रमुख सामग्री मिली है। यह असामान्य खोज हमारी दुनिया से अलग रहने योग्य एक नई दुनिया होने का संकेत देती है।

ये तस्वीर जेम्स वेब टेलीस्कोप ने मार्च 13, 2024 को जारी की थी। इस सुंदर तस्वीर में कॉकटेल वाली बात भी रोचक है, लेकिन ये तारा कौन सा है? ये तत्व वहां कैसे बने होंगे? इसे समझते हैं। 

बता दें कि ये तस्वीर नासा के जेम्स वेब टेलीस्कोप से ली गई है। इस तस्वीर को लेने के लिए एक खास तरह के उपकरण का इस्तेमाल किया गया है, जिसको MIRI या ‘मिड-इंफ्रारेड इंस्ट्रूमेंट’ (Mid-Infrared Instrument) कहते हैं। आसान भाषा में कहे तो तो एक ऐसी दूरबीन जो फोटो खींचने के लिए लाइट की जगह इंफ्रारेड रे या अवरक्त किरणों का इस्तेमाल करती है। इसमें प्रकाश के सात रंगों से इतर हमारी आंखों से ना दिखने वाली किरणों को पकड़ कर फोटो खींची जाती है।

क्या है बेबी स्टार जिसके पास गृह बनने की कही जा रही बात?

मार्गरीटा और सिरके में क्या समानता है? उनमें कुछ वही रासायनिक तत्व शामिल हैं जो NASAWebb ने दो बेबी स्टार्स के आस-पास पाए थे जिन्होंने अभी तक ग्रह नहीं बनाए हैं। हालाँकि उन तारों के आस-पास ग्रह अभी तक नहीं बन रहे हैं, लेकिन वहां पाए गए अणुओं से हमें पता चलता है कि वे संभावित रूप से रहने योग्य दुनिया में ले जाए जा सकते हैं।

इस खोज में दो सर्विंग्स हैं। यह छवि प्रोटोस्टार IRAS 23385 के पास के क्षेत्र को दिखाती है। प्रोटोस्टार IRAS 2A हमारे अपने सौर मंडल के शुरुआती चरणों के समान हो सकता है। इस प्रोटोस्टार के आस-पास पहचाने गए रसायन भी हमारे सौर मंडल के विकास के पहले चरण में रहे होंगे, और बाद में आदिम पृथ्वी (primitive Earth) पर पहुंचाए गए होंगे।

मार्गरीटा, सिरका और चींटी के डंक से जुड़े हैं तत्व?

इसमें जो एरिया दिख रहा है वो IRAS23385 प्रोटोस्टार के पास का एरिया है। जिसे तस्वीर में ऑरेंज कलर से दिखाया गया है। इस प्रोटोस्टार के साथ खास बात ये है कि इसके पास अभी ग्रह नहीं बने हैं। तो इससे साइंटिस्ट्स ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि जब हमारे सौर मण्डल में ग्रह नहीं बने थे, तब वहां कैसा माहौल रहा होगा?

नासा का कहना है कि प्रोटोस्टार के आसपास पाए जाने वाले रासायनिक तत्व जिन्हें IRAS 2A और IRAS23385 के नाम से जाना जाता है, वे रहने योग्य ग्रहों और पृथ्वी पर मिलने वाले मार्गरीटा, सिरका और चींटी के डंक से जुड़े हुए हैं।

खगोलविदों की टीम ने इथेनॉल (अल्कोहल) और संभावित एसिटिक एसिड (सिरका में एक घटक) जैसे जटिल कार्बनिक अणुओं से बने विभिन्न प्रकार के बर्फीले यौगिकों की पहचान करने के लिए वेब के एमआईआरआई (मिड-इन्फ्रारेड इंस्ट्रूमेंट) का उपयोग किया है। यह कार्य ठंडे, गहरे आणविक बादल में विविध बर्फों की पिछली वेब खोज पर आधारित है।

नासा ने बताया कि ये ग्रह अभी तक उन तारों के आस-पास नहीं बन रहे हैं, ये और वेब द्वारा वहां पाए गए अन्य अणु संभावित रूप से रहने योग्य दुनिया बनाने के लिए प्रमुख सामग्रियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

विज्ञान कार्यक्रम के समन्वयकों में से एक, लीडेन विश्वविद्यालय के इविन वैन डिशोएक ने नासा पोस्ट में कहा, जब प्रोटोस्टेलर प्रणाली विकसित होती है तो ये सभी अणु धूमकेतु और क्षुद्रग्रहों (comets and asteroids) और अंततः नई ग्रह प्रणालियों का हिस्सा बन सकते हैं, जब बर्फीले पदार्थ को ग्रह-निर्माण डिस्क में अंदर की ओर ले जाया जाता है।

विज्ञान टीम ने सरल अणुओं का भी पता लगाया, जिनमें फॉर्मिक एसिड (जो चींटी के काटने पर जलन पैदा करता है), मीथेन, फॉर्मेल्डिहाइड और सल्फर डाइऑक्साइड (Methane, Formaldehyde and Sulfur Dioxide) शामिल हैं।

शोध से पता चलता है कि सल्फर डाइऑक्साइड जैसे सल्फर युक्त यौगिकों ने पृथ्वी पर चयापचय प्रतिक्रियाओं (metabolic reactions) को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

डिशोएक ने कहा कि, हम आने वाले वर्षों में अधिक वेब डेटा के साथ इस एस्ट्रोकेमिकल ट्रेल का चरण-दर-चरण अनुसरण करने के लिए तत्पर हैं।

ये अवलोकन JOYS+ (जेम्स वेब ऑब्जर्वेशन ऑफ यंग प्रोटोस्टार्स) कार्यक्रम के लिए किए गए थे।

इसको कॉकटेल क्यों कहा जा रहा है?

दरअसल साइंटिस्ट्स ने अनुमान लगाया है कि यहां पर एथेनॉल, मेथिल फॉर्मेट, एसीटेल्डिहाइड और एसिटिक एसिड जैसे कैमिकल हो सकते हैं।

E-Magazine