श्रीलंका में 25 जिलों के 300 छात्रों को दी गई महात्मा गांधी स्कॉलरशिप


कोलंबो, 10 फरवरी (आईएएनएस)। श्रीलंका के सभी 25 जिलों के 300 विद्यार्थियों को महात्मा गांधी छात्रवृत्ति दी गई। इस मौके पर श्रीलंका की प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या, शिक्षा और उच्च शिक्षा उप मंत्री मधुरा सेनेविरत्ना और भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त सत्यंजल पांडे मौजूद थे। कोलंबो स्थित शिक्षा मंत्रालय में हुए इस खास समारोह में मेधावी छात्रों को स्कॉलरशिप थमाई गई।

भारतीय उच्चायोग के मुताबिक, छात्रों को मेरिट-कम-मीन्स स्कॉलरशिप के तहत हर महीने 2,500 एलकेआर (श्रीलंकाई मुद्रा) दिया जाता है। इसके लिए हर जिले के शीर्ष छह छात्रों का चुनाव किया जाता है। इस साल का समारोह 2021 से 2024 तक के समय के बीच एक साथ दो बैच को स्कॉलरशिप देने के लिए खास रहा।

भारतीय उच्चायोग की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, “प्रधानमंत्री माननीय (डॉ.) हरिनी अमरसूर्या ने महात्मा गांधी स्कॉलरशिप देने और श्रीलंका में इसके कई दूसरे कामों के लिए भारत सरकार का शुक्रिया अदा किया। छात्रवृत्ति से सम्मानित छात्रों को बधाई देते हुए, प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी के विचारों और आदर्शों को याद किया और छात्रों को उनकी विरासत को आगे बढ़ाने में योगदान देने को कहा।”

इसमें आगे कहा गया, “छात्रों को उनकी कामयाबी पर बधाई देते हुए, कार्यवाहक उच्चायुक्त डॉ. सत्यंजल पांडे ने कहा कि महात्मा गांधी स्कॉलरशिप सिर्फ जरूरतमंद और काबिल छात्रों के लिए एक फाइनेंशियल अवॉर्ड नहीं है, बल्कि जिंदगी भर के लिए एक पहचान है। उन्होंने कहा कि सम्मानित छात्रों से शैक्षिक क्षेत्र में ही अच्छा करने की उम्मीद नहीं की जाती, बल्कि माना जाता है कि वे अपनी पूरी जिंदगी महान नेता के सद्विचारों को आगे बढ़ाते रहेंगे और उनका प्रसार भी करेंगे।”

छात्रवृत्ति के अलावा, भारत सरकार इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, आर्ट्स, साइंस और देसी मेडिसिन जैसे क्षेत्रों को तकरीबन 210 सालाना स्कॉलरशिप देती है। भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) योजना के तहत श्रीलंकाई सरकारी अधिकारियों के लिए 400 से अधिक पूरी तरह से वित्त पोषित अल्पकालिक प्रशिक्षण स्लॉट प्रदान किए हैं।

इसके अलावा, दिसंबर 2024 में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के आधिकारिक दौरे के दौरान, भारत में पांच साल के समय में 1500 श्रीलंकाई सिविल सर्वेंट्स को ट्रेनिंग देने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया था। वहीं, अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान, भारत ने श्रीलंकाई पेशेवरों के लिए हर साल 700 विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम में शामिल होने का ऑफर दिया था।

–आईएएनएस

केआर/


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