'वर्ल्ड ऑर्डर में आ रहे बदलावों' की ओर मैक्रों ने दिलाया ध्यान, यूरोप को सलाह, 'झुकने से नहीं चलेगा काम'


पेरिस, 10 फरवरी (आईएएनएस)। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वर्ल्ड ऑर्डर में आ रहे बदलावों के बीच यूरोप को इससे निपटने के लिए तैयार रहने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा है कि अब झुकने की रणनीति से नहीं काम चलेगा बल्कि हमें एक होकर वर्तमान परिस्थिति का मजबूती से मुकाबला करना होगा।

यूरोपीय मीडिया आउटलेट्स को दिए एक इंटरव्यू में, मैक्रों ने चेतावनी दी कि यूएस और दूसरी जियोपॉलिटिकल ताकतों के आगे झुकने की रणनीति काम नहीं करती है और उन्होंने यूरोप से भविष्य की “हमेशा की अस्थिरता” का सामना करने के लिए तुरंत एकजुट होने की सलाह दी।

उन्होंने एल पैस, सुडड्योचो जाइतुंग (जर्मन अखबार), फाइनेंशियल टाइम्स, और ल मॉन्ड सहित दूसरों से कहा, “यूरोप के जागने का समय आ गया है… अगर हम खुद फैसला नहीं करते हैं, तो हम बह जाएंगे।”

मैक्रों ने कहा कि यूरोप “एक गहरे भू-राजनीतिक उन्माद” का सामना कर रहा है, जो व्यापार और रक्षा क्षेत्र के लिए “गहरा झटका” है, क्योंकि चीन और यूएस के साथ उसके रिश्ते बदल रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि सबसे अच्छा तरीका है कि रिस्क कम किया जाए, डिपेंडेंसी कम की जाए, और अगले संकट का इंतज़ार करने के बजाय खुद फैसले लिए जाएं।”

उन्होंने कहा, “अगर हम दर्शक बने रहना चुनते हैं, तो हम गुलाम बन जाएंगे,” उन्होंने इसे “ग्रीनलैंड मोमेंट” का नाम दिया। फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि अपने नाटो सहयोगी के इलाके में यूएस की दिलचस्पी यूरोपीय नेताओं के लिए एक वेक-अप कॉल होनी चाहिए।

मैक्रों ने कहा कि यूरोपियन “मजबूत खड़े हैं, लेकिन बहुत धीरे रिएक्ट करते हैं,” उन्हें महाद्वीप पर ज्यादा “कॉमन लीडरशिप” के साथ एक ग्लोबल सुपरपावर के तौर पर अपनी जगह पक्की करने की जरूरत है।

उन्होंने तर्क दिया कि यूक्रेन के लिए फ्रेंको-ब्रिटिश के नेतृत्व वाला ‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ एक ऐसी पहल का उदाहरण था जिसने यूरोप को अपने हितों की रक्षा के लिए डिफेंस और सिक्योरिटी के क्षेत्र समेत एक मजबूत, इंटरनेशनल अलायंस बनाने की इजाजत दी।

इसी दौरान मैक्रों ने एक हैरान करने वाला बयान भी दे डाला। उन्होंने एक बार फिर सुझाव दिया कि यूरोप को मास्को के साथ डिप्लोमैटिक चैनल फिर से खोलने चाहिए।

उन्होंने कहा कि यूरोप को रूस के साथ “बिना नादानी किए या यूक्रेनियन पर दबाव डाले, और इन बातचीत को करने के लिए किसी तीसरे पक्ष पर निर्भर हुए बिना” बातचीत करनी चाहिए। “हमें यूरोप के हितों की रक्षा करनी है, और मैं उन्हें किसी को नहीं सौंपने वाला, यूएस को भी नहीं।”

–आईएएनएस

केआर/


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