बैंक फ्रॉड मामले में लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने चार दोषियों को 8 साल की जेल की सजा सुनाई

लखनऊ, 10 मार्च (आईएएनएस)। लखनऊ की एक स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश में 6.75 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड मामले में चार लोगों को 8 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई और उन पर 70-70 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।
सीबीआई के एक बयान में कहा गया है कि स्पेशल कोर्ट ने रामजी मिश्रा, श्यामजी मिश्रा, अखिलेश कुमार मिश्रा और मनीषी पांडे को सजा दी है।
कोर्ट ने इस मामले में दो प्राइवेट कंपनियों को भी दोषी ठहराया है। ये दो प्राइवेट फर्म हैं: मनीषी एंटरप्राइजेज, वाराणसी, और मिर्जापुर कार्पेट्स। कोर्ट ने दोनों फर्मों पर 2 करोड़ रुपए का जॉइंट फाइन लगाया है।
सीबीआई ने 13 मार्च 2001 को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, मिर्जापुर के उस समय के ब्रांच मैनेजर एसएन वर्मा और दूसरों के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप था कि मिर्जापुर कार्पेट्स ने 1996 में जाली डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल करके बैंक की मिर्जापुर शाखा से क्रेडिट फैसिलिटी ली थी।
सीबीआई ने कहा कि कथित जुर्म के समय रामजी मिश्रा इसके मैनेजिंग डायरेक्टर थे और श्यामजी मिश्रा और अखिलेश कुमार मिश्रा इसके डायरेक्टर थे।
जांच पूरी होने के बाद, केंद्रीय जांच एजेंसी ने 17 मार्च, 2004 को सात आरोपियों और दो फर्मों के खिलाफ एक कंबाइंड चार्जशीट फाइल की।
चार्जशीट में एसएन वर्मा, उस समय के ब्रांच मैनेजर, यदु नाथ दुबे, पंकज कुमार तिवारी, मनीषी पांडे, रामजी मिश्रा, श्यामजी मिश्रा, अखिलेश कुमार मिश्रा, मनीषी एंटरप्राइजेज, अपने मेन एग्जीक्यूटिव पार्टनर के जरिए और मिर्जापुर कार्पेट्स, अपने मैनेजिंग डायरेक्टर के जरिए जाली बिलों का इस्तेमाल करके बैंक को 6.75 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने के लिए नामजद किया गया था।
स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने ट्रायल के बाद आरोपियों को दोषी ठहराया और उसी हिसाब से सज़ा सुनाई। सीबीआई ने कहा कि वर्मा, उस समय के ब्रांच मैनेजर और यदुनाथ दुबे (प्राइवेट व्यक्ति) को सभी आरोपों से इस आधार पर बरी कर दिया गया है कि उनकी तरफ से क्रिमिनल साजिश का सबूत नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि स्पेशल कोर्ट ने मेडिकल ग्राउंड पर आरोपी पंकज कुमार तिवारी के खिलाफ फाइल अलग कर दी है।
–आईएएनएस
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