खजान सिंह: महान तैराक, वैश्विक खेलों में देश के लिए जीते पदक

नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। भारत में तैराकी एक पारंपरिक खेल है। आधुनिक समय में वैश्विक स्तर पर इस खेल को पेशेवर रूप में खेला जाता है। एक पेशेवर खेल के तौर पर तैराकी भारत में विकासशील अवस्था में है। भारत में तैराकी को एक पेशेवर खेल के रूप में स्थापित करने में जिन तैराकों ने अहम भूमिका निभाई है, उसमें खजान सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
खजान सिंह का जन्म 6 मई 1964 को दिल्ली के मुनिरका गांव में हुआ था। उनका पूरा नाम खजान सिंह टोकस है। खजान सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान ही तैराकी में रुचि लेनी शुरू कर दी थी।
1981-82 की नेशनल स्कूल चैंपियनशिप में खजान सिंह ने अपनी पहचान बनाई। इस प्रतियोगिता में उन्होंने पांच स्वर्ण पदक जीते थे। इसके बाद, 1982 में दिल्ली में आयोजित नेशनल एक्वेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने पांच स्वर्ण, दो रजत, और एक कांस्य पदक अपने नाम किए। इसके अगले साल त्रिवेंद्रम में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने सात स्वर्ण, दो रजत, और एक कांस्य पदक जीते।
1987 में अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय जलीय चैंपियनशिप में खजान सिंह ने न केवल सात स्वर्ण पदक जीते, बल्कि 100 मीटर फ्रीस्टाइल में 55.21 सेकंड का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया। उन्होंने 1984 के दक्षिण एशियाई खेलों में बनाया गया अपना पुराना रिकॉर्ड तोड़ा। 1988 में कोलकाता में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने आठ व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जिनमें से पांच नए रिकॉर्ड भी शामिल थे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खजान सिंह ने 1986 के सियोल एशियाई खेलों में 200 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में रजत पदक जीता। यह उपलब्धि विशेष थी। इस पदक के बाद भारत को एशियाई खेल में अगला पदक 24 साल बाद वीरधवल खाड़े ने 2010 में आयोजित एशियाई खेलों में दिलाया। खाड़े ने कांस्य पदक जीता।
खजान सिंह का दक्षिण एशियाई खेलों में प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने 1984 काठमांडू खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। 1989 में इस्लामाबाद में आयोजित खेलों में कुल सात पदक हासिल किए थे। 1988 एशियाई तैराकी चैंपियनशिप (बीजिंग) में कांस्य और विश्व पुलिस खेलों में रजत पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई थी।
ब्रिसबेन में 1982 में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में, 1988 में सियोल ओलंपिक में खजान सिंह ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
भारत सरकार ने 1984 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया था।
अपने खेल करियर के बाद खजान सिंह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में शामिल हुए और डीआईजी के पद तक पहुंचे।
62 साल के होने जा रहे खजान सिंह मौजूदा समय में नई दिल्ली में खजान सिंह स्विमिंग अकादमी का संचालन करते हैं, और इसके माध्यम से नई पीढ़ी के तैराकों को प्रशिक्षित करते हैं।
–आईएएनएस
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