राज्यपाल के अभिभाषण में व्यवधान लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ: केशव प्रसाद मौर्य


लखनऊ, 9 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत के अवसर पर राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष के हंगामे को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने निंदनीय करार दिया है।

उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर आसीन राज्यपाल के अभिभाषण में व्यवधान लोकतंत्र की गरिमा और संसदीय परंपराओं के प्रतिकूल है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और यहां मर्यादित आचरण अपेक्षित होता है। विपक्ष द्वारा अभिभाषण न सुने जाने और उग्र प्रदर्शन किए जाने से सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है।

उन्होंने कहा कि राज्यपाल एक अनुभवी महिला हैं और उनके संवैधानिक दायित्वों का सम्मान किया जाना चाहिए। मौर्य ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण केवल औपचारिक भाषण नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार की उपलब्धियों, नीतिगत प्रतिबद्धताओं और भविष्य के संकल्पों का दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि यह अभिभाषण 25 करोड़ जनता के विश्वास और उत्तर प्रदेश को समृद्ध व सशक्त बनाने की दिशा में सरकार के संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकार बिना रुके और बिना थके उत्तर प्रदेश को देश का सर्वोत्तम राज्य बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

उप मुख्यमंत्री ने अभिभाषण में प्रस्तुत प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास, औद्योगिक निवेश और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश तेजी से देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता गरीब, वंचित और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। अंत्योदय के संकल्प के तहत समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

कानून व्यवस्था के मुद्दे पर मौर्य ने कहा कि प्रदेश में सुदृढ़ कानून व्यवस्था के कारण ही निवेशकों का विश्वास बढ़ा है और उत्तर प्रदेश आज एक सुरक्षित राज्य के रूप में नई पहचान बना चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने और महिलाओं की सुरक्षा व सशक्तीकरण के लिए उठाए गए कदमों का स्पष्ट उल्लेख है, जो सरकार की समावेशी विकास नीति को दर्शाता है।

–आईएएनएस

विकेटी/एएस


Show More
Back to top button