जापान ने बनाई राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी, विश्लेषकों ने जताई सैन्य विस्तार की आशंका

बीजिंग, 4 अगस्त (आईएएनएस)। जापान सरकार ने 31 जुलाई को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी की स्थापना की। इसका उद्देश्य खुफिया जानकारी जुटाने और उसके विश्लेषण की क्षमता को मजबूत करना बताया गया है।
हालांकि, इस कदम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी की स्थापना और पहली राष्ट्रीय खुफिया बैठक का आयोजन केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं है, बल्कि यह जापान के सैन्य विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, यह जापान के पुनः सैन्यीकरण की प्रक्रिया को तेज करने के इरादे को भी दर्शाता है।
विश्लेषकों का मानना है कि ताकाइची सरकार ने राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी की स्थापना के साथ जापान की खुफिया व्यवस्था में व्यापक बदलाव की शुरुआत कर दी है। उनका कहना है कि आने वाले समय में सरकार आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की खुफिया गतिविधियों और क्षमताओं को और मजबूत करेगी तथा पूरी खुफिया प्रणाली को आधुनिक रूप देगी।
इसी क्रम में बताया गया है कि जापान सरकार पहली राष्ट्रीय खुफिया रणनीति तैयार करने की योजना बना रही है। साथ ही, वह जासूसी रोकथाम कानून लाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। इसके तहत तथाकथित जासूसी विरोधी कानून और नियम तैयार किए जाएंगे तथा अगले वर्ष संसद के नियमित सत्र में संबंधित विधेयक पेश करने की योजना है। इसके अलावा, सरकार मार्च 2028 तक एक बाह्य खुफिया एजेंसी स्थापित करना चाहती है, ताकि विदेशों में ख़ुफिया गतिविधियों को और प्रभावी बनाया जा सके।
विश्लेषकों का कहना है कि जापान अपनी राष्ट्रीय ख़ुफिया व्यवस्था का व्यापक पुनर्गठन कर रहा है। इसके तहत राष्ट्रीय खुफिया बैठक और राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी को केंद्र में रखकर एक केंद्रीकृत ढांचा तैयार किया जा रहा है। साथ ही, जासूसी रोकथाम कानून और बाह्य खुफिया एजेंसी की स्थापना के जरिए आंतरिक और बाहरी दोनों स्तरों पर खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता को मजबूत करने की तैयारी की जा रही है।
विश्लेषकों के अनुसार, इतिहास में जापानी खुफिया एजेंसियों ने देश के सैन्यवाद और विदेशी आक्रामक अभियानों को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई थी, जिसके कारण एशिया के कई देशों और जापान की जनता को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उनका कहना है कि ताकाइची सरकार के सत्ता में आने के बाद खुफिया क्षेत्र में उठाए गए इन कदमों ने जापान के भीतर भी व्यापक बहस छेड़ दी है।
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि खुफिया व्यवस्था में सुधार और आंतरिक तथा बाहरी ख़ुफिया क्षमताओं को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदम एक ओर जापान की सैन्य क्षमता को बढ़ाने में मदद करेंगे, वहीं दूसरी ओर इन्हें युद्धोत्तर व्यवस्था की सीमाओं से बाहर निकलने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। उनके अनुसार, यह ‘सामान्य देश’ बनने के नाम पर जापान के पुनः सैन्यीकरण की दिशा में बढ़ते कदमों का संकेत है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
–आईएएनएस
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