4 जनवरी विशेष: भारतीय क्रिकेट के बड़े पोस्टर बॉय माने गए इरफान पठान ने लिया था संन्यास

नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम में इरफान पठान को एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में याद किया जाता है जिनका करियर उनकी क्षमता के मुताबिक आकार नहीं ले सका। कपिल देव के बाद कभी भारतीय टीम के लिए खेले सबसे प्रभावशाली तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर माने गए इरफान पठान संन्यास के बाद क्रिकेट कमेंटेटर और विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं।
इरफान पठान का जन्म 27 अक्टूबर 1984 को बड़ौदा में हुआ था। उनके बड़े भाई युसूफ पठान भी क्रिकेटर हैं, इसलिए क्रिकेट का खुमार इरफान पर बचपन में ही चढ़ गया। बाएं हाथ से स्विंग के साथ तेज गेंदबाजी करने वाले और बाएं हाथ के एक सक्षम बल्लेबाज इरफान पर क्रिकेट का जुनून ऐसा चढ़ा कि 2003 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मात्र 19 साल की उम्र में डेब्यू किया।
डेब्यू के बाद से तीनों फॉर्मेट में पठान को लगातार मौके मिले। गेंदबाजी के साथ ही उन्हें कोच ग्रेग चैपल ने बतौर बल्लेबाज भी मौके दिए। इरफान 2007 में टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य रहे। 2008 के बाद इंजरी और फॉर्म में गिरावट की वजह से वह टीम से लगातार बाहर रहे। इरफान ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच अक्टूबर 2012 में खेला, जो टी20 था। इसके बाद उन्हें कभी भारतीय टीम के लिए खेलने का मौका नहीं मिला।
करियर की शुरुआत में वसीम अकरम सहित दुनिया के तमाम दिग्गजों को अपनी स्विंग गेंदबाजी से प्रभावित करने वाले इरफान पठान ने राष्ट्रीय टीम से ड्रॉप होने के लंबे समय बाद 4 जनवरी 2020 को क्रिकेट से संन्यास ले लिया था।
2003 से 2012 के बीच 29 टेस्ट में 100 विकेट और 1 शतक, 6 अर्धशतक सहित 1,105 रन उनके नाम पर दर्ज हैं। पठान ने 120 वनडे मैचों में 5 अर्धशतक की मदद से 1,544 रन बनाए और 173 विकेट लिए, वहीं 24 टी20 मैचों में 172 रन बनाने के साथ ही 28 विकेट उन्होंने लिए।
इरफान पठान का उदय एक बड़े पोस्टर बॉय के रूप में हुआ था। स्टारडम, फैंस, विज्ञापन सब कुछ उनके पास जल्दी आया, लेकिन उनके करियर का अंत एक साधारण क्रिकेटर के रूप में हुआ। हालांकि एक गेंदबाज के रूप में करियर के शुरुआती दिनों में उन्होंने जो क्षमता दिखाई थी, उसके लिए उनका नाम भारतीय क्रिकेट में सम्मान के साथ लिया जाता है।
–आईएएनएस
पीएके