जन विश्वास विधेयक, 2026 ने स्वास्थ्य क्षेत्र में छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया


नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 में किए गए संशोधन स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रमुख कानूनों को कवर करते हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए अनुपालन को सरल बनाने के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप हैं। यह बयान शुक्रवार को स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने दिया।

नए विधेयक के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के भीतर संशोधनों में औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940, फार्मेसी अधिनियम, 1948, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम; नैदानिक ​​प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010, और राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग अधिनियम, 2021 सहित प्रमुख कानून शामिल हैं।

इन सुधारों की एक प्रमुख विशेषता यह है कि मामूली प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के लिए आपराधिक दंड, विशेष रूप से कारावास, को श्रेणीबद्ध मौद्रिक दंडों से प्रतिस्थापित किया गया है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्रभावित करने वाले गंभीर उल्लंघनों के लिए सख्त कार्रवाई को बरकरार रखते हुए, अधिक सुगम नियामक ढांचे की ओर एक बदलाव का संकेत देता है।

स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने कहा कि औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 में कई प्रावधानों में संशोधन किया गया है, जिसके तहत कारावास के स्थान पर आर्थिक दंड लागू किए गए हैं और एक सुव्यवस्थित न्यायनिर्णय तंत्र स्थापित किया गया है। विशेष रूप से, धारा 27ए(ii) और धारा 28ए के तहत उल्लंघनों के लिए न्यायनिर्णय तंत्र शुरू किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सौंदर्य प्रसाधनों (नकली या मिलावटी को छोड़कर) के मामले में मामूली उल्लंघनों के लिए न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होगी और इसके बजाय नागरिक दंड प्रणाली के माध्यम से उनका निपटारा किया जा सकेगा।

इसके अलावा दस्तावेज़ों का रखरखाव न करना या सूचना प्रस्तुत न करना जैसे उल्लंघन, जिन पर पहले न्यायालय द्वारा जुर्माना या कारावास लगाया जाता था, अब इस नागरिक दंड तंत्र के माध्यम से निपटाए जा सकते हैं। पहली बार, अधिनियम में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा न्यायनिर्णय प्राधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है, साथ ही कारण बताओ नोटिस जारी करने, व्यक्तिगत सुनवाई का प्रावधान और अपील तंत्र से संबंधित एक परिभाषित प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है।

इस सुधार से अदालतों पर बोझ काफी कम होगा, मुकदमेबाजी की जटिलताएं कम होंगी और अनुपालन से जुड़े छोटे-मोटे मामलों का तेजी से समाधान संभव होगा। इससे विशेष रूप से सौंदर्य प्रसाधन उद्योग को लाभ होगा, क्योंकि इससे प्रक्रियात्मक चूक जैसे कि वैधानिक अभिलेखों या दस्तावेजों का रखरखाव न करना जैसे छोटे-मोटे उल्लंघनों का व्यवस्थित और पूर्वानुमानित तरीके से निपटारा हो सकेगा, जो अब लंबे समय तक चलने वाली मुकदमेबाजी से मुक्त होंगे।

जन विश्वास विधेयक, 2026 पर एफआईसीसीआई के चेयरमैन अनंत गोयनका ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वास-आधारित और सुगम नियामक व्यवस्था की दिशा में एक परिवर्तनकारी बदलाव के रूप में एफआईसीसीआई जन विश्वास विधेयक 2026 का स्वागत करता है। 79 अधिनियमों के अंतर्गत 1,000 से अधिक अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करके और दंडों को तर्कसंगत बनाकर, यह सुधार अनुपालन में अधिक स्पष्टता, पूर्वानुमान और आनुपातिकता लाता है, व्यापार करने में सुगमता को मजबूत करता है, उद्यमिता और नवाचार को प्रोत्साहित करता है, और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करता है।”

–आईएएनएस

एबीएस/


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