झारखंड विधानसभा में गूंजा एलपीजी किल्लत का मुद्दा, बोले मंत्री- आपूर्ति में कमी से चिंताजनक स्थिति हुई

रांची, 16 मार्च (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 15वें दिन राज्य में रसोई गैस और कॉमर्शियल सिलेंडरों की भारी किल्लत का मुद्दा सदन में प्रमुखता से छाया रहा। संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन को सूचित किया कि घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति व्यवस्था चरमराने के कारण आम उपभोक्ताओं को किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
मंत्री ने कहा कि जो आपूर्ति पहले बुकिंग के महज 48 घंटों के भीतर सुनिश्चित हो जाती थी, वह अब शहरी क्षेत्रों में 5 से 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में करीब 45 दिनों के लंबे इंतजार तक पहुंच गई है। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है। सदन में प्रस्तुत आंकड़े के अनुसार, तेल कंपनियों के पास रिफिलिंग के लिए सिलेंडरों का बड़ा अंबार लगा हुआ है।
वर्तमान में आईओएल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के पास कुल मिलाकर लगभग 3 लाख 27 हजार 630 सिलेंडर रिफिलिंग के इंतजार में लंबित हैं, जिसने पूरी वितरण श्रृंखला पर भारी दबाव बना दिया है। आपूर्ति में आ रही इस बाधा का सबसे बुरा असर ग्रामीण क्षेत्रों के उन उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जिन्हें समय पर गैस न मिलने के कारण पुनः पुराने ईंधन के साधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
मंत्री ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में आई गिरावट पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने बताया कि राज्य में व्यावसायिक गैस की आपूर्ति 80 प्रतिशत से घटकर महज 20 प्रतिशत रह गई है। झारखंड में कॉमर्शियल गैस की मासिक आवश्यकता लगभग 2,273 मीट्रिक टन है, जबकि वर्तमान में केवल 454 मीट्रिक टन गैस ही उपलब्ध हो पा रही है। इस प्रकार राज्य करीब 1,118 मीट्रिक टन गैस की कमी से जूझ रहा है।
इस संकट का सीधा असर होटल, रेस्तरां और छोटे औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर पड़ रहा है, जिससे न केवल औद्योगिक गतिविधियां सुस्त पड़ रही हैं, बल्कि राज्य के जीएसटी राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। संसदीय कार्य मंत्री ने वैश्विक बाजार में तेल और गैस की बढ़ती कीमतों को इस संकट का एक बड़ा कारण बताते हुए कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में गंभीर है, लेकिन केंद्र सरकार को भी इस राष्ट्रीय संकट के समाधान के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है।
–आईएएनएस
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