केंद्रीय बजट 2026 से भारत की विकास गाथा में विश्वास बढ़ा है : उद्योग जगत


नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। उद्योग प्रतिनिधियों ने रविवार को कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 राजकोषीय अनुशासन, संरचनात्मक सुधारों और निजी निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लक्षित उपायों के माध्यम से भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय रोडमैप प्रस्तुत करता है।

आईएएनएस से बात करते हुए, सीआईआई पंजाब के अध्यक्ष अमीन जैन ने कहा कि बजट में वस्त्र क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं शामिल हैं।

जैन ने आगे कहा कि इनमें मेगा टेक्सटाइल पार्कों का विकास, श्रम-प्रधान वस्त्र क्षेत्रों के लिए एकीकृत योजनाएं और विरासत वस्त्र पार्कों का पुनर्विकास शामिल है, जो घरेलू वस्त्र उद्योग को महत्वपूर्ण बढ़ावा प्रदान करेंगे।

उन्होंने 10,000 करोड़ रुपए के एमएसएमई फंड की घोषणा का भी स्वागत किया और कहा कि देश में एमएसएमई की सबसे बड़ी संख्या वस्त्र क्षेत्र में है।

जैन ने कहा कि नए फंड से पूरे क्षेत्र को लाभ होने की उम्मीद है।

इंडिया चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष नरेश पचीसिया ने बजट को संतुलित बताया और कहा कि इससे आर्थिक विकास दर को लगभग 7 प्रतिशत पर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने सभी क्षेत्रों में लक्षित योजनाओं की घोषणा की है, जिससे व्यापक विकास सुनिश्चित होगा।

पचिसिया ने आगे कहा कि सरकार ने मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के लिए मजबूत राजकोषीय अनुशासन बनाए रखा है।

पचिसिया ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत निर्धारित किया गया है, जबकि अगले वित्त वर्ष के लिए इसे 4.3 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है, जो वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के विरुद्ध अधिक मजबूती प्रदान करता है।

पीएचडीसीसीआई की प्रत्यक्ष कर समिति के अध्यक्ष मुकुल बागला ने कहा कि बजट सही दिशा में एक कदम है।

उन्होंने बताया कि राजकोषीय घाटा वर्तमान में 4.4 प्रतिशत है और इसे धीरे-धीरे घटाकर 4 प्रतिशत करने की योजना है।

बागला ने आगे कहा कि जहां पिछले बजट में कई कर राहत उपायों की घोषणा की गई थी, वहीं मौजूदा बजट स्थिरता पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है।

–आईएएनएस

एमएस/


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