भारत का पीएमआई फरवरी में तीन महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा, आउटपुट में तेज बढ़त


नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई डेटा फरवरी में बढ़कर तीन महीनों के उच्चतम स्तर 59.3 पर पहुंच गया है, जो कि जनवरी में 58.4 था। यह जानकारी शुक्रवार को एसएंडपी द्वारा संकलित डेटा में दी गई।

डेटा में बताया गया कि पीएमआई में तेज बढ़ोतरी की वजह फैक्ट्री उत्पादन में बढ़ोतरी होना है। हालांकि, सर्विसेज गतिविधियों की वृद्धि जनवरी के मुताबिक ही समान रही है।

एचएसबीसी में भारत के लिए मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, “उत्पादन में मजबूत वृद्धि और नए घरेलू ऑर्डरों के समर्थन से फरवरी में मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री मजबूत हुई है।”

समग्र स्तर पर, फरवरी में हुई वृद्धि पिछले सितंबर के बाद सबसे मजबूत रही।

भंडारी ने आगे कहा, “बढ़ती महंगाई के बावजूद, मैन्युफैक्चरर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स दोनों ही भविष्य को लेकर आशावादी थे।”

भारत में निजी क्षेत्र की कंपनियों ने फरवरी के दौरान कुल नए ऑर्डर और अंतरराष्ट्रीय बिक्री में हुई तीव्र वृद्धि का स्वागत किया, जिससे उन्हें अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

इसके अलावा, व्यवसायों में विकास की संभावनाओं को लेकर आशावाद बढ़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सुधारों के साथ-साथ महंगाई का दबाव भी बढ़ा, जिससे इनपुट लागत और विक्रय शुल्क दोनों में तेजी से वृद्धि हुई।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि उत्पादन के रुझान के समान, कुल नए ऑर्डर में पिछले नवंबर के बाद से सबसे तेज गति से वृद्धि हुई है।

सर्वेक्षण में भाग लेने वालों ने वृद्धि का श्रेय मांग में मजबूती, स्थानीय पर्यटन, विपणन प्रयासों और ग्राहकों की बढ़ती पूछताछ को दिया।

वस्तुओं के उत्पादकों ने सेवा कंपनियों की तुलना में कुल बिक्री में अधिक मजबूत वृद्धि दर्ज की, और यह वृद्धि पिछले चार महीनों में सबसे तेज थी। वहीं, सेवा कंपनियों की वृद्धि 13 महीनों के निचले स्तर पर आ गई थी।

गुणात्मक आंकड़ों से पता चला कि प्रतिस्पर्धी दबाव और अन्य जगहों पर सस्ती सेवाओं की उपलब्धता ने इस तेजी को धीमा कर दिया।

आंकड़ों से पता चला, “सेवा अर्थव्यवस्था ने निर्यात के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर में अगस्त 2025 के बाद से सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई।”

अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती के अलावा, माल उत्पादकों ने खरीद की मात्रा भी बढ़ाई। फरवरी में इनपुट खरीद में वृद्धि चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

आंकड़ों से अनुसार, आपूर्तिकर्ता समय पर सामग्री की आपूर्ति करने में सक्षम थे, और विक्रेताओं के बेहतर प्रदर्शन का सिलसिला दो साल से जारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे कंपनियों को कच्चे माल और अर्ध-तैयार वस्तुओं का स्टॉक बढ़ाने में मदद मिली।

–आईएएनएस

एबीएस/


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