भूराजनीतिक तनावों के बावजूद भारत का निर्यात मजबूत: फियो


नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, सप्लाई चेन में बाधाओं और बढ़ते भूराजनीतिक तनाव के बावजूद भारत का निर्यात क्षेत्र मजबूत बना हुआ है। यह जानकारी सोमवार को फियो यानी फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (एफआईईओ) ने दी।

उद्योग संगठन ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत का कुल निर्यात सालाना आधार पर लगभग 11 प्रतिशत बढ़कर 76.13 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

हालांकि, फरवरी 2026 में मर्चेंडाइज (माल) निर्यात में हल्की गिरावट देखने को मिली और यह 0.81 प्रतिशत घटकर 36.61 अरब डॉलर रह गया।

इस दौरान मर्चेंडाइज आयात में 24.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो बढ़कर 63.71 अरब डॉलर हो गया। इसके कारण फरवरी में व्यापार घाटा 27.1 अरब डॉलर रहा, जो जनवरी 2026 की तुलना में थोड़ा कम है।

वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से फरवरी के बीच भारत का मर्चेंडाइज निर्यात 402.93 अरब डॉलर रहा, जो 1.84 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वहीं इसी अवधि में आयात 8.53 प्रतिशत बढ़कर 713.53 अरब डॉलर हो गया।

इस अवधि में सामान और सेवाओं को मिलाकर कुल निर्यात लगभग 790.86 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 747.58 अरब डॉलर की तुलना में 5.8 प्रतिशत अधिक है।

फियो के अध्यक्ष एस. सी. राल्हन ने कहा कि निर्यात क्षेत्र लगातार मजबूती दिखा रहा है और इसका मुख्य कारण नए बाजारों में विस्तार और कई प्रमुख क्षेत्रों का अच्छा प्रदर्शन है।

उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग उत्पाद, पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान, फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और आभूषण, केमिकल्स, रेडीमेड गारमेंट्स, कॉटन यार्न और फैब्रिक, चावल और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों ने निर्यात में अच्छा योगदान दिया है।

भारत के प्रमुख निर्यात बाजारों में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), चीन, नीदरलैंड, ब्रिटेन, जर्मनी, सऊदी अरब, बांग्लादेश, सिंगापुर और हांगकांग शामिल हैं।

राल्हन ने कहा कि भूराजनीतिक घटनाक्रमों पर नजर रखना, लॉजिस्टिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना और समय पर नीतिगत सहयोग देना निर्यात की रफ्तार बनाए रखने के लिए जरूरी होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि नए बाजारों में विस्तार, क्षेत्रीय व्यापार साझेदारी को मजबूत करना और लॉजिस्टिक व्यवस्था को बेहतर बनाना भारत को वैश्विक चुनौतियों से निपटने और निर्यात बढ़ाने में मदद करेगा।

इस बीच मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़ा बढ़ता संघर्ष वैश्विक व्यापार के लिए नई अनिश्चितताएं पैदा कर रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों में बाधा आने के कारण जहाजों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे माल ढुलाई लागत, बीमा प्रीमियम और ट्रांजिट समय में बढ़ोतरी हुई है। इसका असर निर्यातकों पर अतिरिक्त दबाव के रूप में पड़ रहा है।

–आईएएनएस

डीबीपी


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