वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में और तेज हो सकती है भारत की आर्थिक वृद्धि: अर्थशास्त्री

नई दिल्ली, 28 फरवरी (आईएएनएस)। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, उच्च आवृत्ति (हाई फ्रीक्वेंसी) संकेतकों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि और तेज हो सकती है। नई जीडीपी सीरीज के आधार पर वित्त वर्ष 2026 के लिए विकास दर का अनुमान 7.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया गया है।
बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री जाह्नवी प्रभाकर ने कहा, “नई सीरीज में बदलाव का राजकोषीय अनुपात पर ज्यादा और स्थायी असर नहीं पड़ेगा। इसके साथ हम वित्त वर्ष 2027 के लिए 7 से 7.5 प्रतिशत वृद्धि के अपने अनुमान पर कायम हैं।”
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026 में 7.6 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि हासिल की जा सकती है और यह उनके अनुमान के अनुरूप है।
यह वृद्धि मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दोहरे अंकों (11.5 प्रतिशत, पहले 9.3 प्रतिशत) की मजबूत वृद्धि के कारण होगी, जिसने पिछले तीन वर्षों में लगातार विस्तार किया है।
इसके अलावा, व्यापार, हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2026 में इस सेक्टर की वृद्धि 10.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 6.6 प्रतिशत थी।
नॉमिनल संदर्भ में, निर्यात में मजबूत वृद्धि (8.3 प्रतिशत से 9.6 प्रतिशत) के साथ-साथ पीएफसीई में 8.9 प्रतिशत की स्थिर बढ़ोतरी वित्त वर्ष 2026 में मजबूत विकास को सहारा देगी।
हाल ही में जीएसटी दरों में किए गए तर्कसंगत बदलाव के बाद खपत मांग में अच्छी तेजी देखी गई है। शहरी खपत में सुधार भी विकास के लिए सकारात्मक संकेत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि टैरिफ को लेकर, खासकर अमेरिका में हालिया बदलावों के कारण, कुछ अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, अन्य देशों के साथ नए व्यापार समझौते संभावित नकारात्मक असर को कम कर सकते हैं।
नई सीरीज के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में जीवीए (सकल मूल्य वर्धन) 7.8 प्रतिशत बढ़ा, जो वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही के 7.4 प्रतिशत से अधिक है। सेवाएं और मैन्युफैक्चरिंग दोनों सेक्टरों ने इसमें अहम योगदान दिया।
सेवाओं के भीतर वृद्धि व्यापक रही। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में व्यापार और होटल सेक्टर ने 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही के 6.7 प्रतिशत से काफी अधिक है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जीडीपी सीरीज के आधार वर्ष में बदलाव (रीबेसिंग) का राजकोषीय अनुपात पर ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।
–आईएएनएस
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