भारत के 120 अरब डॉलर के डिजिटल कॉमर्स सेक्टर को मिलेगा नया प्लेटफॉर्म, आईएएमएआई ने लॉन्च की ई-कॉमर्स काउंसिल ऑफ इंडिया

नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल कॉमर्स सेक्टर को एक साझा प्लेटफॉर्म देने के उद्देश्य से इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) ने ई-कॉमर्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ईसीसीआई) लॉन्च की है। यह अपनी तरह का पहला राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य सरकार, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स और अन्य प्रमुख हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर देश के डिजिटल कॉमर्स इकोसिस्टम को मजबूत बनाना है। इस पहल के जरिए नीतिगत सुधार, शोध और आपसी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि भारत का डिजिटल कारोबार वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।
ईसीसीआई के लॉन्च कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. लवीश भंडारी ने कहा कि भारत के ई-कॉमर्स सेक्टर की अगली विकास यात्रा केवल नई तकनीक और इनोवेशन पर नहीं, बल्कि उद्योग और सरकार के बीच बेहतर सहयोग पर निर्भर करेगी। उनका कहना था कि यदि उद्योग एकजुट होकर महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर अपनी साझा राय रखेगा, तो सरकार अधिक प्रभावी नीतियां बना सकेगी। इससे कारोबार के लिए बेहतर माहौल तैयार होगा और उपभोक्ताओं, विक्रेताओं तथा पूरी अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा।
आईएएमएआई के अनुसार, भारत का डिजिटल कॉमर्स अब केवल ऑनलाइन खरीदारी तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस, ऑनलाइन सेवाएं, मोबिलिटी प्लेटफॉर्म, ट्रैवल टेक, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन, डिजिटल पेमेंट्स, डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (डी2सी) ब्रांड, निर्यात, क्रॉस-बॉर्डर व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कॉमर्स जैसे कई क्षेत्र शामिल हो चुके हैं। यही वजह है कि अब इस पूरे इकोसिस्टम के लिए एक ऐसे मंच की जरूरत महसूस की जा रही थी, जहां उद्योग और सरकार मिलकर भविष्य की नीतियों पर काम कर सकें।
ई-कॉमर्स काउंसिल ऑफ इंडिया में देश और दुनिया की कई प्रमुख डिजिटल कंपनियां शामिल हुई हैं, जिनमें अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्विगी, इटरनल, इंडियामार्ट, मेकमाईट्रिप, इक्सिगो, ऊबर, रैपिडो, शिपरॉकेट, ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (टीसीआईएल), ईबे, मीशो और टाटा 1एमजी जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा स्टार्टअप्स, एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स कंपनियां, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर, टेक्नोलॉजी कंपनियां, एक्सपोर्टर्स, शिक्षण संस्थान और उद्योग विशेषज्ञ भी इस मंच का हिस्सा बनेंगे।
ई-कॉमर्स काउंसिल ऑफ इंडिया देश के डिजिटल कॉमर्स से जुड़े कई अहम क्षेत्रों पर काम करेगी। इनमें सर्विस ई-कॉमर्स, प्रोडक्ट ई-कॉमर्स, क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल ट्रेड, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन, मोबिलिटी, एमएसएमई को बाजार तक पहुंच दिलाना, ट्रैवल टेक, उपभोक्ता भरोसा, डिजिटल पेमेंट्स, जिम्मेदार डिजिटल कारोबार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य की नई तकनीकों को बढ़ावा देना शामिल है।
आईएएमएआई के अध्यक्ष डॉ. सुभो रे ने कहा कि डिजिटल कॉमर्स आज भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। इससे न केवल कारोबार करने का तरीका बदला है, बल्कि उपभोक्ताओं को उत्पाद और सेवाएं उपलब्ध कराने का स्वरूप भी पूरी तरह बदल गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में डिजिटल कॉमर्स की तेज और टिकाऊ वृद्धि के लिए सरकार और उद्योग के बीच लगातार सहयोग जरूरी होगा। इसी सोच के साथ ईसीसीआई की स्थापना की गई है, जो नीति निर्माण, शोध, बेहतर कारोबारी मानकों और उद्योग-सरकार के बीच संवाद का प्रमुख मंच बनेगी।
ईसीसीआई की दीर्घकालिक योजना के तहत हर वर्ष इंडियन ई-कॉमर्स समिट (आईईसीएस) आयोजित की जाएगी, जिसमें सरकार, उद्योग, शिक्षाविदों और वैश्विक डिजिटल कॉमर्स विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर डिजिटल व्यापार और ई-कॉमर्स के भविष्य पर चर्चा की जाएगी। इसका उद्देश्य भारत को डिजिटल कॉमर्स और डिजिटल ट्रेड के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर आगे बढ़ाना है।
इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) की स्थापना वर्ष 2004 में हुई थी। यह एक गैर-लाभकारी उद्योग संगठन है, जिसके 800 से अधिक सदस्य हैं, और इनमें भारतीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ-साथ कई स्टार्टअप भी शामिल हैं। यह संस्था डिजिटल उद्योग के लिए अनुकूल नीतियों, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, स्टार्टअप्स को बढ़ावा, शोध, उपभोक्ता सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास के लिए काम करती है।
–आईएएनएस
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