भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था, घरेलू निवेशकों के बढ़ते भरोसे से शेयर बाजार को मिल रही मजबूती: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। देश में मजबूत आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ पूंजी बाजार में भी संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी।
जब कई बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण अपनी विकास दर के अनुमान घटा रही हैं, भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। आईएमएफ के अनुसार, भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि चीन की विकास दर 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
आईएमएफ ने यह भी अनुमान लगाया है कि पूरे वर्ष के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रह सकती है, भले ही अमेरिका द्वारा लंबे समय तक टैरिफ लगाए जाने की स्थिति बनी रहे।
इस महीने की शुरुआत में आईएमएफ ने कहा था कि 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि में भारत का योगदान करीब 17 प्रतिशत तक हो सकता है, जिससे यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
आईएमएफ की शीर्ष 10 देशों की सूची में अमेरिका से वैश्विक जीडीपी वृद्धि में लगभग 9.9 प्रतिशत योगदान की उम्मीद है, इसके बाद इंडोनेशिया 3.8 प्रतिशत, तुर्की 2.2 प्रतिशत, सऊदी अरब 1.7 प्रतिशत और वियतनाम 1.6 प्रतिशत योगदान दे सकते हैं। वहीं, नाइजीरिया और ब्राजील का योगदान लगभग 1.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था का असर देश के पूंजी बाजार में हो रहे बड़े बदलावों में भी दिखाई दे रहा है।
इस बीच घरेलू म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने 2025 में अपने एसेट बेस में करीब 14 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की, जिससे नवंबर तक कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) बढ़कर रिकॉर्ड 81 लाख करोड़ रुपए हो गया।
साल 2025 में एसआईपी (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए निवेश भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जहां वार्षिक योगदान 3.34 लाख करोड़ रुपए रहा। यह 2024 में 2.68 लाख करोड़ रुपए और 2023 में 1.84 लाख करोड़ रुपए था।
पहले भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों का ज्यादा प्रभाव होता था, लेकिन अब घरेलू निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से बाजार की स्थिति बदल रही है।
हालांकि इसके बावजूद भारत में अभी भी केवल 15 से 20 प्रतिशत परिवार ही शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। इसके मुकाबले अमेरिका में यह भागीदारी 50 से 60 प्रतिशत तक है, जिससे पता चलता है कि भारत में घरेलू निवेश के विस्तार की अभी काफी संभावनाएं मौजूद हैं।
–आईएएनएस
डीबीपी