पीएम मोदी की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति से भारत नक्सलवाद से काफी हद तक मुक्त : तुहिन सिन्हा


मुंबई, 30 मार्च (आईएएनएस)। भाजपा के प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के चलते भारत नक्सलवाद से काफी हद तक मुक्त हुआ है।

उन्होंने आईएएनएस से बातचीत के दौरान दावा किया कि सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप लगभग 1,000 नक्सलियों को निष्क्रिय किया गया है, जबकि 4,000 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में आर्थिक अवसरों का विस्तार हुआ है। इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वर्ष 2014 में जो लगभग 100 जिले नक्सल आतंकवाद से प्रभावित थे, वे अब धीरे-धीरे इस समस्या से बाहर निकल रहे हैं। इन क्षेत्रों में अब विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर गढ़चिरौली, जो कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, वहां लगभग 10 हजार करोड़ रुपए की लागत से एक स्टील प्लांट का निर्माण हो रहा है। यह परियोजना न केवल क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करेगी, बल्कि पूर्व नक्सलियों को भी मुख्यधारा में शामिल कर उन्हें स्थायी आजीविका प्रदान करेगी और क्षेत्र को एक आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करेगी।

उन्‍होंने आगे कहा कि इसी तरह बस्तर क्षेत्र, जहां कभी नक्सली हिंसा की घटनाएं सबसे अधिक होती थीं, वहां पिछले दो वर्षों से ‘बस्तर ओलंपिक्स’ का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में 40 से 50 प्रतिशत तक प्रतिभागी वे लोग हैं, जो पहले नक्सल गतिविधियों में शामिल थे और अब मुख्यधारा में लौट चुके हैं। यह बदलाव सामाजिक समावेशन और शांति की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इन लगभग 100 जिलों में आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं हैं और आने वाले दशकों में ‘विकसित भारत’ की दिशा में ये क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अगले तीन-चार वर्षों में केवल इन जिलों के योगदान से ही देश की जीडीपी में हर साल 0.5 से 0.7 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है।

तुहिन सिन्हा ने यह भी कहा कि नक्सलमुक्त भारत, मोदी सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। पिछले 49 वर्षों में नक्सल आतंकवाद के कारण देश ने लगभग 25,000 लोगों को खोया है, जिनमें कई राजनेता भी शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया और नक्सलवाद को आतंकवाद मानने से भी परहेज किया, जिसके कारण उस समय नक्सली हमले अपने चरम पर पहुंच गए थे।

–आईएएनएस

एएसएच/एबीएम


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