भारत और बांग्लादेश ने मछुआरों का किया एक्सचेंज, 23 भारतीय और 128 बांग्लादेशी शामिल थे


नई दिल्ली, 29 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश के अधिकारियों ने हाल ही में गलती से इंटरनेशनल मैरीटाइम बाउंड्री लाइन पार करने वाले भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार किया। इसी तरह भारतीय अधिकारियों ने भी बांग्लादेश के मछुआरों को पकड़ा।

विदेश मंत्रालय की ओर से इस संबंध में जानकारी दी गई। एमईए ने बताया कि दोनों सरकारों ने गुरुवार को सभी 23 भारतीय मछुआरों और 128 बांग्लादेशी मछुआरों को उनके चलने वाले जहाज के साथ सफलतापूर्वक रिहा कर दिया और वापस भेज दिया।

इससे पहले जनवरी और दिसंबर में भारत सरकार ने 142 भारतीय मछुआरों को रिहा करने में मदद की थी, और बदले में 128 बांग्लादेशी मछुआरों को रिहा किया था।

बांग्लादेश कोस्ट गार्ड को बंगाल की खाड़ी में इंटरनेशनल समुद्री सीमा पर एक हैंडओवर सेरेमनी में इंडियन कोस्ट गार्ड से 128 बांग्लादेशी मछुआरों के साथ पांच बांग्लादेशी मछली पकड़ने वाली नावें मिलीं।

वहीं, बांग्लादेश ने 23 भारतीय मछुआरों और दो भारतीय मछली पकड़ने वाली नावें इंडियन कोस्ट गार्ड को सौंप दीं। बांग्लादेशी मीडिया ने बताया कि वहां की विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, बांग्लादेश कोस्ट गार्ड, मत्स्य और पशुधन मंत्रालय, शिपिंग मंत्रालय, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश, बांग्लादेश पुलिस और स्थानीय प्रशासन समेत कई सरकारी एजेंसियों ने मिलकर मछुआरों की वापसी की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए काम किया।

इससे पहले 10 दिसंबर के आसपास बांग्लादेश और भारत ने 32 बांग्लादेशी और 47 भारतीय मछुआरों को वापस भेजा। इन लोगों को 2025 की शुरुआत में समुद्री सीमा उल्लंघन के लिए हिरासत में लिया गया था।

बांग्लादेशी मीडिया द डेली स्टार ने बताया कि बांग्लादेशी नेवी ने 12 जुलाई और 2 अगस्त 2025 को समुद्री सीमा के पास बांग्लादेश के पानी में गैर-कानूनी तरीके से मछली पकड़ने के आरोप में पांच भारतीय मछली पकड़ने वाली नावों और 47 मछुआरों को हिरासत में लिया था।

भारतीय कोस्ट गार्ड के एक अधिकारी ने बताया कि इंडियन कोस्ट गार्ड ने 12 और 17 सितंबर को दो बांग्लादेशी मछली पकड़ने वाली नावों और 32 मछुआरों को भारतीय पानी में घुसने के आरोप में हिरासत में लिया था।

बाद में विदेश मंत्रालय ने इस लेन-देन के लिए एक तीन-तरफा समझौता किया, जिसमें बांग्लादेश कोस्ट गार्ड को हैंडओवर और रिसेप्शन करने का काम सौंपा गया।

–आईएएनएस

केके/डीकेपी


Show More
Back to top button