साल 2025 में खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ लगभग 4.85 लाख छापे मारे गए


नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। सरकार ने मंगलवार को बताया कि 2025 में देश भर में घटिया क्वालिटी की खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी, डायवर्जन और बिक्री के खिलाफ 4,84,663 छापे मारे गए, जिसके परिणामस्वरूप 17,392 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में बताया कि इन छापों के कारण 6,941 लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किए गए और 847 एफआईआर दर्ज की गईं। उन्होंने उर्वरकों की बिना रुकावट सप्लाई और किफायती दाम बनाए रखने के लिए सरकार के व्यापक सिस्टम के बारे में भी बताया।

सरकारी आंकड़ों से पता चला कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस की उपलब्धता जरूरत से कहीं ज्यादा थी।

उस अवधि के लिए, यूरिया की 381 लाख मीट्रिक टन की जरूरत के मुकाबले उपलब्धता 450.79 लाख मीट्रिक टन थी। डीएपी की 110 लाख मीट्रिक टन की जरूरत को 121.72 लाख मीट्रिक टन की उपलब्धता से आसानी से पूरा किया गया।

कृषि और किसान कल्याण विभाग और उर्वरक विभाग राज्य सरकारों के साथ मिलकर महीने-वार और राज्य-वार उर्वरक की जरूरतों का आकलन करते हैं और मासिक योजनाओं के जरिए सप्लाई का आवंटन करते हैं।

सभी प्रमुख सब्सिडी वाले उर्वरकों की आवाजाही को इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (आईएफएमएस) के जरिए ट्रैक किया जाता है।

सरकार घरेलू उत्पादन और मांग के बीच के अंतर को पाटने के लिए उर्वरक आयात को भी काफी पहले ही तय कर लेती है और समय पर सप्लाई के लिए निर्माताओं और आयातकों के साथ तालमेल बिठाती है।

मंत्री ने कहा कि यह उर्वरक रेक (मालगाड़ी के डिब्बों) की प्राथमिकता के आधार पर आवाजाही के लिए रेल मंत्रालय के साथ मिलकर काम करता है, और राज्य सरकारें जिला-स्तर पर वितरण की देखरेख करती हैं।

यूरिया सब्सिडी योजना और पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के जरिए किसानों के लिए उर्वरक किफायती बने रहते हैं। यूरिया सब्सिडी योजना के तहत, यूरिया के 45 किलोग्राम के बैग की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) 242 रुपए प्रति बैग रहती है, और डिलीवरी लागत और बाजार से मिलने वाली कीमत के बीच के अंतर की भरपाई निर्माताओं या आयातकों को सब्सिडी के तौर पर की जाती है।

खरीफ 2026 के दौरान डीएपी को 1,350 रुपए प्रति 50 किलोग्राम बैग पर किफायती बनाए रखने के लिए, आयातित और घरेलू डीएपी और आयातित टीएसपी पर एनबीएस सब्सिडी के अलावा 3,500 रुपए प्रति मीट्रिक टन की अतिरिक्त सहायता दी गई है।

मंत्री ने बताया कि सरकार ने सुरक्षित और गुणवत्ता वाले कीटनाशकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी कई कदम उठाए हैं।

कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत गठित पंजीकरण समिति कीटनाशकों की प्रभावशीलता और सुरक्षा का मूल्यांकन करने के बाद ही उनका पंजीकरण करती है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त कीटनाशक निरीक्षक, क्वालिटी की जांच के लिए मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और रिटेल आउटलेट्स से नियमित रूप से सैंपल इकट्ठा करते हैं।

–आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी


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