अमेरिकी टैरिफ नीति के झटकों को सहने की स्थिति में भारत, उभरते जी-20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था: रिपोर्ट


नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत उन्नत और उभरते जी-20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा और हमारा घरेलू बाजार का बड़ा आकार देश को अमेरिकी टैरिफ नीति से पड़ने वाले संभावित झटकों के प्रति कम संवेदनशील बनाता है।

एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 19 प्रतिशत मोडेस्ट एक्सटर्नल डेब्ट टू जीडीपी रेशो (जीडीपी अनुपात में अपेक्षाकृत मामूली बाह्य ऋण) और अमेरिकी बाजार पर निर्यात को लेकर कम निर्भरता (जीडीपी का मात्र 2 प्रतिशत) भारत को दुष्प्रभावों से मुकाबला करने में सक्षम बनाती हैं।

रेटिंग एजेंसी ने भारत में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 6.5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो 2024-25 में 6.7 प्रतिशत से कम है। उसने मुद्रास्फीति के औसतन 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया, जो गत वित्त वर्ष में 4.9 प्रतिशत थी।

इससे आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए कम ब्याज दरों और अर्थव्यवस्था में अधिक लिक्विडिटी के साथ सॉफ्ट मनी पॉलिसी का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।

मूडीज ने कहा, “भारत तथा ब्राजील जैसे बड़े उभरते बाजार अपनी बड़ी और घरेलू रूप से उन्मुख अर्थव्यवस्थाओं, बड़े घरेलू पूंजी बाजारों, मध्यम नीति विश्वसनीयता और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के दम पर ऐसी परिस्थितियों में वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।”

मूडीज ने समझाया, “इसके विपरीत, छोटी और ओपन अर्थव्यवस्थाएं ‘इंवेस्टर सेंटीमेंट’ और ‘मुद्रा अस्थिरता’ के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, जैसा कि विदेशी मुद्रा में ऋण के बड़े हिस्से वाली अर्थव्यवस्थाएं अर्जेंटीना और कोलंबिया हैं।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उभरते बाजार की वृद्धि 2025-26 में कुल मिलाकर धीमी हो जाएगी, लेकिन देशों के बीच व्यापक भिन्नताओं के साथ सॉलिड बनी रहेगी।

रिपोर्ट में कहा गया, उभरते बाजारों का ग्रोथ, 2025-26 में कुल मिलाकर धीमा लेकिन दृढ़ रहेगा, जिसमें प्रत्येक देश की स्थिति के अनुसार व्यापक अंतर देखने को मिलेगा। एशिया-प्रशांत में वृद्धि सबसे अधिक रहेगी, लेकिन वैश्विक व्यापार में इस क्षेत्र के एकीकरण का मतलब है कि यह अमेरिकी टैरिफ और वृद्धि को धीमा करने की उनकी क्षमता के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील है।

–आईएएनएस

एसकेटी/केआर


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