मुझे लगता है कि यह एक अच्छा बजट है: रिटायर्ड आईआरएस अधिकारी अनिल के रावल


नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। एक फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट पेश किया। इस बजट की रिटायर्ड आईआरएस अधिकारी अनिल के रावल ने सराहना की है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह एक अच्छा बजट है।

नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में रिटायर्ड आईआरएस अधिकारी अनिल के रावल ने कहा कि लोगों को इस बजट को स्टॉक मार्केट के उतार-चढ़ाव के आधार पर नहीं आंकना चाहिए। यह एक अच्छा बजट है। हमें इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि शेयर बाजार किस दिशा में जा रहा है। प्राथमिकताएं मायने रखती हैं। बजट सरकार की दिशा दिखाता है-सरकार किस रास्ते पर चल रही है और वह क्या हासिल करना चाहती है। यह बजट सरकार की दिशा और लंबे समय की प्राथमिकताओं को साफ तौर पर दिखाता है।

उन्होंने कहा कि पहले हम बजट को मुख्य रूप से इस नजरिए से देखते थे कि हमें क्या राहत मिल रही है और कौन-कौन से उपाय घोषित किए गए हैं। लेकिन अब, जैसा कि हमने मिड-टर्म बजट में देखा, जीएसटी के तहत काफी राहत मिल चुकी है। हमारी अर्थव्यवस्था अच्छी गति से बढ़ रही है और हमारी मुख्य प्राथमिकता इसे बनाए रखना है। हमें यह देखना है कि अगले 20 साल में इस ग्रोथ का क्या असर रहेगा।

रावल ने कहा कि हम अभी जो पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) कर रहे हैं, वह भविष्य में ग्रोथ को कैसे बनाए रखेगा, यह महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ सालों में हमारा मुख्य फोकस सड़कें बनाने पर था। इस बार आप देख सकते हैं कि हम सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए पानी की नहरों के जरिए लॉजिस्टिक्स मूवमेंट पर भी काम कर रहे हैं और रेलवे में स्पेशल कॉरिडोर बना रहे हैं। ये सभी पहल अब गहरे सुधारों की ओर बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि जब पूंजीगत व्यय बढ़ता है, तो महंगाई को नियंत्रित करना जरूरी हो जाता है और राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखना और भी अहम हो जाता है।

राजकोषीय प्रबंधन पर बात करते हुए रावल ने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को 4.3 प्रतिशत पर रखने के लिए सरकार की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि घाटे को 5 प्रतिशत से नीचे बनाए रखना मजबूत वित्तीय अनुशासन का संकेत है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद सरकार अपने वित्त को जिम्मेदारी से प्रबंधित करने की अच्छी स्थिति में है।

रावल के अनुसार, बजट का एक और बड़ा फोकस अर्थव्यवस्था का औपचारिकीकरण (फॉर्मलाइजेशन) है। उन्होंने बताया कि ईएसआई जैसी योजनाओं की सीमा बढ़ाकर और अधिक श्रमिकों व व्यवसायों को औपचारिक व्यवस्था में लाकर सरकार लीकेज को कम कर रही है और अनुपालन (कंप्लायंस) में सुधार कर रही है। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे छोटे और अनौपचारिक व्यवसायों को खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में संरचित आर्थिक ढांचे में एकीकृत कर रही है।

डिजिटल ट्रैकिंग और कर चोरी पर उन्होंने कहा कि यह सबसे जरूरी सुधार है। डेटा आधुनिक प्रवर्तन (एनफोर्समेंट) की रीढ़ है। जैसे आधुनिक युद्ध टेक्नोलॉजी और ड्रोन के इस्तेमाल से लड़े जाते हैं, वैसे ही आज वित्तीय प्रवर्तन डेटा-आधारित हो गया है। जीएसटी जैसे विभाग बिना किसी परेशानी के सिस्टम के जरिए नकली सप्लायर और संदिग्ध लेन-देन की पहचान कर सकते हैं। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही में काफी सुधार होता है।

–आईएएनएस

डीकेएम/एमएस


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