हिमाचल प्रदेश: 'विकसित भारत-जी राम जी' योजना भारत के लिए एक नया आयाम स्थापित करने जा रही है: राजीव बिंदल

शिमला, 7 जनवरी (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने एक दूरदर्शी और समयबद्ध राष्ट्रव्यापी ग्रामीण रोजगार योजना शुरू की है।
राजीव बिंदल ने मीडिया से बातचीत में कहा, “‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन’ (विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम) ग्रामीण भारत के लिए एक नया आयाम स्थापित करने जा रहा है। यह योजना केवल रोजगार प्रदान करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एक ठोस और परिणामोन्मुखी ढांचा तैयार करने के लिए भी है जो रोजगार को सीधे ग्रामीण विकास से जोड़ता है।”
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से लगातार सरकारों ने ग्रामीण रोजगार के उद्देश्य से विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं। ग्रामीण श्रमशक्ति कार्यक्रम (1960-61) से लेकर 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम तक कई पहलें लागू की गईं। मनरेगा 2005 से 2025 तक जारी रहा। हालांकि, बदलती सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों, अनुभव, और जमीनी स्तर की कमियों को देखते हुए एक नई और अधिक प्रभावी योजना की आवश्यकता महसूस हुई। इसी के फलस्वरूप ‘विकसित-जी राम जी’ अधिनियम को लाया गया।
पार्टी अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई थी, लेकिन वास्तविकता में औसतन केवल 50.4 दिनों का ही रोजगार सृजित हुआ।
उन्होंने आगे बताया, “इसके विपरीत, ग्राम विकास योजना (विकसित भारत-जी राम जी) 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करती है, जो विकास परियोजनाओं से जुड़ी होगी। इस योजना के तहत, ग्राम सभा स्तर पर एक ग्राम विकास योजना तैयार की जाएगी, जिसे ब्लॉक और जिला स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा और पीएम गति शक्ति के साथ एकीकृत किया जाएगा। इस विकास योजना को लागू करने के लिए रोजगार सृजित किया जाएगा, जिससे गांवों का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।”
बिंदल ने इस बात पर जोर दिया कि इस योजना का एक बड़ा लाभ यह है कि यह पूरी तरह से टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इसके प्रावधानों में बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल निगरानी, छह महीने की समीक्षा प्रणाली और समय पर भुगतान शामिल हैं। यदि रोजगार या भुगतान समय पर नहीं किया जाता है, तो लाभार्थी को मुआवजा देने का प्रावधान है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि हिमाचल प्रदेश जैसे हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र-राज्य वित्त पोषण अनुपात 90:10 तय किया गया है, जो राज्य के लिए बेहद फायदेमंद है। अन्य राज्यों के लिए यह अनुपात 60:40 है। केंद्र ने विभिन्न राज्यों की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह प्रावधान किया है।
बिंदल ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 2006 से 2014 तक मनरेगा पर 2.13 लाख करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि एनडीए सरकार ने 2014 से 2025 के बीच 8.53 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए। रोजगार सृजन के संदर्भ में, यूपीए काल में 1,660 मिलियन दिन लोगों को काम मिला, जबकि मोदी सरकार के दौरान यह संख्या 3,210 मिलियन रही।
उन्होंने कहा कि यूपीए काल में पूर्ण परियोजनाओं की संख्या 153 लाख थी, जबकि एनडीए काल में यह बढ़कर 862 लाख हो गई, जो भाजपा सरकार की गंभीरता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
–आईएएनएस
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