हरियाणा किसानों के लिए प्रौद्योगिकी आधारित ऋण शुरू करने के लिए तैयार


चंडीगढ़, 30 जनवरी (आईएएनएस)। कृषि ऋण में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण सुधार के तहत, हरियाणा सरकार एक पारदर्शी और प्रौद्योगिकी आधारित ग्रामीण ऋण प्रणाली शुरू करने जा रही है, जिससे किसानों को ऋण संबंधी दस्तावेजों के लिए बैंकों और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने की झंझट से मुक्ति मिलेगी। यह जानकारी राज्य की वित्तीय आयुक्त (राजस्व) सुमिता मिश्रा ने शुक्रवार को दी।

सरकार जल्द ही भारतीय रिजर्व बैंक के साथ भारत की सबसे उन्नत एकीकृत कृषि ऋण प्रणालियों में से एक विकसित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेगी।

इस ढांचे के तहत, कृषि ऋणों की स्वीकृति सीधे डिजिटल भूमि अभिलेखों से जुड़ी होगी, जिससे वित्तीय संस्थानों और राजस्व प्रशासन के बीच सुचारू समन्वय सुनिश्चित होगा।

इस पहल के बारे में जानकारी देते हुए सुमिता मिश्रा ने कहा कि यह नई प्रणाली कृषि ऋण वितरण के तरीके में एक मौलिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने कहा कि किसानों को अब ऋण प्राप्त करने के लिए केवल अपने आधार नंबर की आवश्यकता होगी, क्योंकि भूमि से संबंधित सभी विवरण राज्य के डिजिटल रिकॉर्ड से स्वतः प्राप्त कर लिए जाएंगे।

उन्होंने एक बयान में कहा कि यह केवल एक तकनीकी उन्नयन नहीं है, बल्कि किसानों के लिए सार्वजनिक सेवा वितरण का एक पूर्ण पुनर्गठन है। पटवारी-तहसील-बैंक का वह पुराना चक्र, जिसके कारण देरी होती थी, अब समाप्त हो जाएगा।

यह परियोजना दो चरणों में लागू की जाएगी। पहला चरण किसान क्रेडिट कार्ड ऋण पर केंद्रित होगा, जो राज्य में सबसे व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला कृषि ऋण साधन है।

आधार प्रमाणीकरण के बाद, भूमि विवरण स्वतः प्राप्त हो जाएगा, ऋण संबंधी प्रविष्टियां भूमि अभिलेखों में स्वतः दर्ज हो जाएंगी, और ऋण चुकाने पर भार प्रविष्टियाँ तुरंत हटा दी जाएंगी।

पूरी प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप बिल्कुल नहीं होगा, जिससे अधिकतम पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

दूसरे चरण में, इस प्रणाली का विस्तार कृषि और ग्रामीण ऋण के सभी रूपों को शामिल करने के लिए किया जाएगा, जिससे पूरे राज्य में एक एकीकृत डिजिटल ऋण प्रणाली का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से सभी हितधारकों को महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे।

किसानों का समय बचेगा, उन्हें ऋण तक त्वरित पहुंच मिलेगी, और ऋण की स्थिति और भूमि अभिलेखों की वास्तविक समय ट्रैकिंग के माध्यम से उन्हें पूर्ण पारदर्शिता प्राप्त होगी। बैंकों और वित्तीय संस्थानों को वास्तविक समय में प्रमाणित भूमि डेटा प्राप्त होगा, जिससे धोखाधड़ी वाले आवेदनों से जुड़े जोखिम कम होंगे और परिचालन दक्षता में सुधार होगा।

–आईएएनएस

एमएस/


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