गोरखपुर को मिलेगा सोलर सिटी का दर्जा, ग्रेटर नोएडा में लॉजिस्टिक्स हब और लखनऊ में मेगा इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को मंजूरी


लखनऊ, 23 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में यूपी के ऊर्जा, औद्योगिक विकास और शहरी बुनियादी ढांचे को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

गोरखपुर को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने, ग्रेटर नोएडा में मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित करने और लखनऊ में कन्वेंशन सेंटर, हेरिटेज संरक्षण व फ्लाईओवर निर्माण जैसी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

कैबिनेट ने गोरखपुर को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए चिलुआताल में 20 मेगावाट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर प्लांट को मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत करीब 80 एकड़ जल क्षेत्र का उपयोग किया जाएगा, जबकि पर्यटन विभाग की 28 एकड़ भूमि कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। यह प्लांट हर साल लगभग 33.29 मिलियन यूनिट हरित ऊर्जा का उत्पादन करेगा, जिससे शहर की पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा।

सोलर सिटी मानकों के अनुसार गोरखपुर को पांच वर्षों में ऊर्जा मांग का कम से कम 10 प्रतिशत अक्षय स्रोतों से पूरा करना होगा। ऊर्जा क्षेत्र में ही एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत पछवारा साउथ कोल ब्लॉक के विकास को मंजूरी दी गई है। लगभग 2242.90 करोड़ रुपये की इस परियोजना के जरिए नेवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड (एनयूपीपीएल) को कोयला उपलब्ध होगा, जिसका उपयोग कानपुर नगर स्थित घाटमपुर तापीय विद्युत परियोजना में किया जाएगा। इससे बिजली उत्पादन लागत में करीब 80 पैसे से 1 रुपये प्रति यूनिट तक कमी आने का अनुमान है, जिससे प्रदेश को सस्ती बिजली उपलब्ध हो सकेगी।

औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘उत्तर प्रदेश मल्टी मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क नीति-2024’ के तहत ग्रेटर नोएडा में 174.12 एकड़ भूमि पर मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इस परियोजना में न्यूनतम 1000 करोड़ रुपए निवेश करने वाली इकाइयों को 30 प्रतिशत फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी दी जाएगी।

भूखंड आवंटन के लिए ई-नीलामी मॉडल अपनाया जाएगा और परियोजना को सात वर्षों में पूरा करना अनिवार्य होगा। यह पार्क प्रदेश में लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और निवेश आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाएगा। इसी क्रम में कैबिनेट ने ‘प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड्स योजना-2026’ को भी मंजूरी दी है, जिसे पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा।

इस योजना के तहत उद्योगों को पहले से तैयार बुनियादी ढांचे वाले शेड्स उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उत्पादन शुरू करने में लगने वाला समय 18-36 महीने से घटकर काफी कम हो जाएगा और एमएसएमई सेक्टर को विशेष लाभ मिलेगा। राजधानी लखनऊ के विकास के लिए भी कई बड़े फैसले लिए गए हैं।

वृन्दावन योजना सेक्टर-15 में प्रस्तावित इंटरनेशनल एक्जीबिशन-सह-कन्वेंशन सेंटर की संशोधित लागत 1,435.25 करोड़ रुपए मंजूर की गई है। इस अत्याधुनिक केंद्र में 10,000 लोगों की क्षमता वाला हॉल और 2,500 लोगों का ऑडिटोरियम बनाया जाएगा, जो लखनऊ को अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनाने में सहायक होगा।

इसके अलावा, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के तहत रोशन-उद-दौला भवन और छतर मंजिल को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिससे हेरिटेज पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने के लिए दुबग्गा चौराहे पर 1.8 किलोमीटर लंबे तीन लेन फ्लाईओवर के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है, जिसकी लागत 305.31 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।

–आईएएनएस

विकेटी/डीके


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