मध्य पूर्व में तनाव कम होने का असर! गोल्डमैन सैश ने भारत की जीडीपी विकास दर अनुमान को बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत किया


नई दिल्ली, 26 जून (आईएएनएस)। वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैश ने भारत की जीडीपी विकास दर के अनुमान को 2026 के लिए बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है, जो कि पहले 6.5 प्रतिशत था। इसकी वजह अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में कमी आना और आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ी चुनौतियां कम होना है।

निवेश बैंक ने वित्त वर्ष 27 तक भारत की भी जीडीपी विकास दर अनुमान को 40 आधार अंक बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है।

गोल्डमैन सैश ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम कम होने के बाद उसने अपने अनुमानों में बदलाव किया है।

इसमें मुख्य महंगाई दर के अनुमान को भी 0.2 प्रतिशत अंक घटाकर 4.4 प्रतिशत कर दिया है और चालू खाता घाटे के अनुमान को भी 0.2 प्रतिशत अंक घटाकर जीडीपी का 1.1 प्रतिशत कर दिया है। निवेश बैंक को अब उम्मीद है कि इस साल बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (बीओपी) जीडीपी का 0.7 प्रतिशत अधिशेष पर रहेगा।

निवेश बैंक ने कहा कि 2026 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर आर्थिक गतिविधि और कच्चे तेल की कम कीमतों के कारण उसने अपने ग्रोथ आउटलुक को ऊपर की ओर संशोधित किया है। मजबूत निवेश और सर्विस सेक्टर की अच्छी गतिविधि के कारण पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ सालाना आधार पर 7.8 प्रतिशत रही।

हालांकि गोल्डमैन सैश को उम्मीद है कि ईंधन की कीमतों में पहले हुई बढ़ोतरी के कारण दूसरी और तीसरी तिमाही में खपत की वृद्धि दर धीमी हो जाएगी, लेकिन तेल की कीमतों में गिरावट ने खुदरा ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी की जरूरत को काफी कम कर दिया है, जिससे तीसरी तिमाही के बाद घरेलू खर्च पर अतिरिक्त दबाव सीमित हो जाएगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक कमोडिटी की कीमतों में नरमी से उर्वरकों और पेट्रोलियम उत्पादों पर सरकार के सब्सिडी बिल में कमी आने की उम्मीद है।

महंगाई के बारे में गोल्डमैन सैश ने कहा कि कच्चे तेल की कम कीमतों की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी का जोखिम काफी कम हो गया है और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर दबाव भी कम हुआ है, जिससे कोर और हेडलाइन महंगाई, दोनों के अनुमान कम हो गए हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तेल की कम कीमतों और रेमिटेंस (विदेश से आने वाली रकम) के बेहतर प्रवाह ने भारत के बाहरी सेक्टर के आउटलुक को बेहतर बनाया है।

हालांकि, गोल्डमैन सैश का मानना ​​है कि मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं और पहले हुई ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर, साल के आखिर में अर्थव्यवस्था के और तेजी पकड़ने से पहले, खपत के लिए कुछ समय तक रुकावटें पैदा कर सकता है।

–आईएएनएस

एबीएस


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