गोवा: दिव्यांग टिंकेश ने रचा इतिहास, मांउट एवरेस्ट के बेस कैंप पर की चढ़ाई

गोवा: दिव्यांग टिंकेश ने रचा इतिहास, मांउट एवरेस्ट के बेस कैंप पर की चढ़ाई

गोवा के 30 वर्षीय टिंकेश कौशिक ने माउंट एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंच कर इतिहास रचा है, क्योंकि वे विकलांग हैं। 11 मई को शारीरिक अक्षमताओं के बावजूद टिंकेश ने चुनौतीपूण यात्रा पूरी की।

30 वर्षीय टिंकेश जो कि ट्रिपल एम्प्युटी ( व्यक्ति जिसके दो पैर या हाथ न हो या फिर वह व्यक्ति जिसके दो हाथ और एक पैर न हो ) है। वे बताते हैं कि 9 साल की उम्र में हरियाणा में बिजली का झटका लगने से एक हादसा हुआ। जिसमें उन्होंने अपने घुटने के नीचे दोनों पैर और एक हाथ खो दिया। कृत्रिम अंग लगवाने के बाद टिंकेश गोवा चले गए। वहां वे एक फिटनेस कोच के रूप में काम करते रहे।

समुद्र तल से 17,598 फीट ऊपर स्थित माउंट एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने वाले पहले ट्रिपल एम्प्युटी बन गए। टिंकेश कहते हैं कि उनको शुरू में लगता था कि यह चढ़ाई आसान होगी क्योंकि वे फिटनेस कोच हैं, लेकिन जैसे-जैसे चुनौतियां आती गईं, उन्हें पता चला कि यह आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके विच्छेदन और कृत्रिम अंगों के कारण पहला दिन बहुत दर्दनाक रहा।

उन्होंने कहा, “मुझे ट्रैकिंग चुनौतीपूर्ण लगी। दूसरे दिन मैंने कहा कि मुझे इसे करना ही है। यह करने लायक ट्रेक है। लेकिन दूसरे दिन मैंने ठान लिया था कि मैं ये पूरा करके रहूंगा। उन्होंने बताया कि बीच में कई बार उनकी तबियत खराब हुई। माउंटेन बाउट का सामना भी करना पड़ा। लेकिन अपनी मानसिक शक्ति को मजबूत कर मैंने यात्रा पूरी कर ली।

यात्रा पूरी होने के बाद टिंकेश ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया कि आज, 11 मई 2024 को, मैंने एवरेस्ट बेस कैंप तक ट्रैकिंग की चुनौती पूरी कर ली। 90 प्रतिशत लोकोमोटर विकलांगता के साथ यह उपलब्धि हासिल की। वह भी पहले ट्रिपल एंप्युटी के रूप में, यह मेरे लिए बहुत भावुक क्षण था। मैंने इसे अपने लिए किया और मैंने इसे एक उद्देश्य के लिए किया। मैं उन सभी को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने इसे वास्तविकता बनाने के लिए मेरा समर्थन किया।

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