डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकवरी से भारतीय बाजारों में हो सकती है एफपीआई की वापसी


नई दिल्ली, 21 जून (आईएएनएस)। वैश्विक स्तर पर स्थिरता बढ़ने से डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकवरी देखने को मिल सकती है और इससे विदेशी निवेशकों की वापसी फिर से भारतीय बाजारों में हो सकती है, जो कि पिछले कुछ समय से शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं। यह जानकारी विश्लेषकों की ओर से रविवार को दी गई।

निफ्टी 500 के लिए वित्त वर्ष 26 में उम्मीद से बेहतर 15.6 प्रतिशत की आय वृद्धि बाजार को बुनियादी सपोर्ट और मजबूती दे रही है।

विश्लेषकों ने आगे कहा कि इस साल अब तक खराब मानसून एक चिंता का विषय बना हुआ है।

15 जून के बाद से फॉरेन पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की गतिविधियों में साफ बदलाव आया है। 19 जून को खत्म हुए हफ्ते के दौरान, एफरीआई ने तीन सत्रों में इक्विटी में खरीदारी की, जबकि सिर्फ दो दिन इक्विटी में बिकवाली की।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने बताया, “19 जून को खत्म हुए हफ्ते में, एफपीआई ने कैश मार्केट में 3,386 करोड़ रुपये की इक्विटी की नेट खरीदारी की है। इससे यह नतीजा निकाला जा सकता है कि भारत में एफपीआई की लगातार बिकवाली का दौर खत्म हो गया है। एफपीआई की गतिविधियों में इस बदलाव की मुख्य वजह रुपये में स्थिरता और उसमें धीरे-धीरे हो रही बढ़त है।”

भारतीय रुपये ने डॉलर के मुकाबले 96.96 के निचले स्तर (जो 20 मई को देखा गया था) से 94.34 (19 जून को क्लोजिंग रेट) तक अच्छी रिकवरी की है।

विश्लेषक ने कहा, “वित्त वर्ष 2027 में एफसीएनआर बी बॉन्ड के जरिए डॉलर का काफी इनफ्लो होने की उम्मीद है। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट (80 डॉलर के स्तर तक) से भारत को वित्त वर्ष 2027 में बिना किसी दबाव के चालू खाते घाटे को फंड करने में मदद मिलेगी।”

दक्षिण कोरिया और ताइवान में कुछ ही शेयरों में निवेश करने से जुड़ा कंसंट्रेशन रिस्क एफपीआई को थोड़ा परेशान कर रहा है।

हालांकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कारोबार और सैमसंग, एसके हाइनिक्स और टीएसएमसी जैसी कंपनियों से भारी मुनाफे की उम्मीद के कारण ये शेयर अभी भी आकर्षक बने हुए हैं।

–आईएएनएस

एबीएस


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