आंध्र प्रदेश में गठबंधन सरकार की राजकोषीय नीति पूरी तरह से विफल: वाईएसआरसीपी


हैदराबाद, 19 जुलाई (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री और वाईएसआरसीपी के वरिष्ठ नेता बुग्गना राजेंद्रनाथ ने एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने उसके राजकोषीय प्रबंधन को खराब बताया और दावा किया कि राज्य वर्तमान में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 60,285 करोड़ रुपए के साथ देश में सबसे अधिक राजस्व घाटे का सामना कर रहा है।

आईएएनएस के साथ एक विशेष साक्षात्कार में वाईएसआरसीपी नेता ने राज्य की वित्तीय स्थिति के संबंध में सरकार के दावों का खंडन किया। राजेंद्रनाथ ने कहा कि आप राज्य के किसी भी बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन पर किसी भी आम आदमी से पूछिए, आपको जवाब मिल जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के कर राजस्व में वृद्धि घटकर 1.97 प्रतिशत हो गई है। इसका परिणाम यह है कि आंध्र प्रदेश देश भर में 22वें स्थान पर गया है और सिक्किम और मेघालय जैसे छोटे राज्यों से भी पिछड़ गया है।

राजेंद्रनाथ ने सत्तारूढ़ कुटमी गठबंधन द्वारा चुनाव पूर्व किए गए उन दावों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने अर्थव्यवस्था का कुप्रबंधन किया था। उन्होंने दावा किया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आधिकारिक आंकड़े इससे अलग ही कहानी बयां करते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में, राज्य के अपने कर राजस्व में माइनस 3.22 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने इसकी तुलना पिछली सरकार के प्रदर्शन से करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, वाईएसआरसीपी सरकार ने राजकोषीय अनुशासन बनाए रखा और औसत राजकोषीय घाटे को 2.5 प्रतिशत से 2.6 प्रतिशत के बीच रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने महज दो वर्षों में 3.4 लाख करोड़ रुपए का कर्ज ले लिया है।

पूर्व मंत्री ने विधानसभा में अपने वित्तीय दावों को सही ठहराने के लिए सरकार द्वारा ‘श्वेत पत्र’ पर निर्भरता पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि क्या कोई ‘श्वेत पत्र’ के अनुसार आधिकारिक जवाब देता है? श्वेत पत्र एक राजनीतिक बयान है, इसकी कोई कानूनी वैधता नहीं होती। उन्होंने आगे कहा कि जिम्मेदार सरकारी अधिकारी सदन के अंदर और बाहर असंगत आंकड़े पेश करके ‘घटिया हथकंडे’ अपना रहे हैं।

राजेंद्रनाथ ने आगे विस्तार से बताया कि वाईएसआरसीपी के पांच साल के कार्यकाल में कुल ऋण लगभग 3.3 लाख करोड़ रुपए था, जो 13.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से अर्जित किया गया था—जो 2014-2019 के टीडीपी कार्यकाल के दौरान दर्ज की गई 22.6 प्रतिशत सीएजीआर से काफी कम है।

–आईएएनएस

एमएस/


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